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Wednesday, October 16, 2013

बेतरतीब मैं (सोलह अक्टूबर)



बेतरतीब मैं (सोलह अक्टूबर)

बीते दशहरे रावण जला ,जिनको जलना था वो इस बार भी बच गए अंतत: सिद्ध हुआ सतयुग में की गई एक गलती आपको जन्म-जन्मान्तर तक अपराधी घोषित करवा सकती है , कलयुग में अपराध को अपराध और अपराधी को अपराधी सिद्ध करना आम मनुष्य के बस की बात नहीं .
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कन्या पूजन हुआ, सुबह से बेटियाँ ढूंढी गई ,जिनके जन्मने पर पड़ोस की भाभी दिलासे देने और चाची ऊपर वाले की मर्ज़ी का ज्ञान बाटने आई थी, आज उनकी पूछ सबसे ज्यादा थी, धन्यवाद देवी माँ अपनी पूजा के नौ दिनों में से एक दिन अपनी बेटियों को देने के लिए
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मेले में घूमते हुए  बचपन अचानक हाँथ थामकर साथ चलने लगा, उसकी ढेरो जिद रेत नमक में भुने पोपकोर्न, बांस से बना सांप , पलके खोलने मूंदने वाली गुडिया आज सब मेरे साथ घर चलने को तैयार , पर इस घर में जब मैं बचपन को नहीं ले जा सकती तो बचपन के साथी कैसे जायेंगे .
फिर मिलना ऐसे ही किसी मेले में .
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ज़िन्दगी महंगी है और उससे भी महंगे जीने के सवाल
कमाल है हमें वो सब चाहिए जो हमारे हाँथ की पहुँच से दूर है एडी उचकाकर भी जो ना छू पाए, हम लालसा करते है निराशा की, हमें मायूसी भाती है जानते हुए के सितारे आस्मां में है और दिए हाँथ की पहुँच में , हम दिए नहीं सितारों की चाह करते है ,और आँखों में दो बूँद मायूसी डालकर सो जाते है

14 comments:

  1. वाह , अच्छा लगा । "दिए हाँथ की पहुँच में , हम दिए नहीं सितारों की चाह करते है ,और आँखों में दो बूँद मायूसी डालकर सो जाते हैं "।

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  2. ज़िन्दगी के तमाम प्रश्न मासूम चेहरे लिए कलम में उतर आये हैं - बहुत ही बढ़िया

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  3. बस एक शब्द ... वाह ..

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  4. स्माइल कर देते हैं... :)

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  5. नमस्कार आपकी यह रचना वृहस्पतिवार (17-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  6. कृपा है माँ कि कन्यों को कुछ दिन पूजवाने के दिए। … बचपन अक्सर अंगुली पकड़कर खड़े दीखता है , पहली बार स्कूल जाते बच्चे की तरह जबरदस्ती अंगुली छुड़ानी पड़ती है !

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  7. हर अगली पंक्ति पढ कर लगा कि पहले वाली से बेहतर है लेकिन सभी अलग हैं... incomparable!!

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  8. टुकड़ों टुकड़ों में बिखरे विचार भी लगा एक कड़ी दूसरे से जुड़ी है ।

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  9. बहुत खूब ... सभी प्रश्न वाजिब ... अपने आप से जवाब मागता समाज शायद इनसब का जवाब कभी दे पाए ...

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  10. kuchh bhi :)
    par betartibi achchi lagi ..........!!

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  11. विचारणीय छिटकन, मेले में बचपन साथ चलने लगता है, हाथ पकड़ कर।

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  12. इन शब्दों को सुननेवाले बहरे है ! भैस के आगे बीन क्यों बजाती हो ! लड़का हो तो अच्छा मगर लड़की हो तो और भी अच्छा !

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  13. अच्छी सामयिक प्रस्तुति...दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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