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Thursday, March 7, 2013

राधे सांवरी होय


(1)
श्याम सजे
ज्यो गोपिका
धरा अनूठा रूप
सांवल तन
घूँघर मुखपर
लीला रची अनूप

(2)
टेसू भिगोया
केसर भिगोई
और पिसाई भांग
मोरपंख धर
राधा सजी ज्यों
मोहन घनश्याम

(3)
नित्य नवल
रास रचाए
राधे तेरो श्याम
फाग चढ़े
बौरा गया
सबरा गोकुलधाम

(4)
श्याम छवि निरख
राधे सांवरी होय
सांवरे के  तन पे 
रंग चढ़े ना कोय

Friday, August 31, 2012

नीला उजास




सत्य है  वह 
या  भ्रम था 
मयूर वर्णी 
उसका तन था 
वैजयंती में 
पिरो गया वह 
वंशीधुन में 
डुबो गया वह 
नयन भी 
मुंदने ना पाये 
अधर भी 
खुलने ना पाये 
मोह मंतर 
पढ़ गया वह 
नीला उजास
भर गया वह 
चाँद उजला 
अब नहीं है 
भोर भी अब 
सुरमई है 
अधखुली आँखे 
भ्रमित मन 
पौ फटी है 
या ढला दिन

Friday, July 22, 2011

नंदलाल के संग

जय जय श्री राधे सरकार
जमुना जी के घाट पर अदभुत रचा प्रसंग
केश खोल राधा खड़ी नंदलाल के संग
चन्दन दतिया पकड़ राह्यों अलक सुलझाए
अतुल श्याम छवि देखकर राधे रही मुसकाय
कौतुक निरख  नंदलाल के गोपी भई निहाल

राधेरानी के केशन में  भले फसे गोपाल
अपनी माया डालकर सब जग रहा नचाय
ऐसे त्रिभंगी लाल को राधे रही सताय
चरण कमल में राख लो  "सोनल" की  अरदास
तव  सुमिरन मात्र मिटे जन्म-जन्म के त्रास .