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Tuesday, July 4, 2017

प्रेम करती हूँ तुमसे

 
यमुना  किनारे उस रात
मेरे हाँथ की लकीरों में 
एक स्वप्न दबाया था ना  
उस क्षण की मधुस्मृतियाँ 
तन को गुदगुदाती है 
उस मनभावन रुत में 
धडकनों का मृदंग

बज उठता  है 
मयूर पंख फैलाए

नृत्य करता है 
सलोना मेघ तकता है

यह मोहक  उत्सव 
इस स्वप्न के 

आवेश में डूबकर 
आँखे मुखर हो उठती हैं  
अधखुले मादक अधरों से 
मौन  प्रीत बरसती है 
जहां गूँज उठता है 

बस उसी पल 
प्रेम करती हूँ तुमसे 

...बस तुमसे 

#हिंदी_ब्लॉगिंग 

12 comments:

  1. वाह बहुत खूबसरत अंदाज़ प्रेम करने का

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  2. बेहतरीन प्रस्तुति

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  3. अप्रतिम मोहक और सुंदर रचना।

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  4. अपनी तो हर रात यमुना किनारे ही बीतती है। आपकी कविता में यमुना का जिक्र हुआ तो यह ध्यान आया।

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  5. बहुत ही सुंदर और सशक्त रचना.

    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  6. सुन्दर भाव
    प्रणाम स्वीकार करें

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  7. अति सुन्दर भाव । बधाई ।

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