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Tuesday, May 21, 2013

बवाल है बवाल है !

बवाल है बवाल है
बड़ा अजब हाल है
लापता से तंत्र में
ये कौम बेहाल है

पटरी से उतर गई
मालामाल कर गई
मामा की रेल है 
भांजा निहाल है

राष्ट्र के गले पड़े
राष्ट्रीय दामाद है
मौन है सारे देवता 
खुजली है खाज है 


नेता भी भीतर है
अभिनेता भी जेल में
भारतीय कारागार अब
राष्ट्रीय ससुराल है

बैट बॉल छोड़कर
गड्डियों का खेल है
खेल खिलाडियों का
अब ठिकाना जेल है

सबके बंद कान है
जनता हैरान है
समझ लो भैया ये
भारत निर्माण है

19 comments:

  1. :-)

    करारा थप्पड़ है ये तो!!!

    अनु

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (22-05-2013) के कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 पर भी होगी!
      सादर...!

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  2. नेता भी भीतर है
    अभिनेता भी जेल में
    भारतीय कारागार अब
    राष्ट्रीय ससुराल है

    ताखे .. चुटीले ... सभी बाण तेज धार लिए हैं ... पर सटीक हैं ... सामयिक हैं ...

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  3. हाँ जी बड़ा बवाल है .

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  4. क्या बात है! वाह !

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  5. govt ne khamakhah apni sarakar ki uplabdhiyon pe paisa foonka hai...tumhari ye poem hi le letey bas... :)gud job!!

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  6. सुंदर और सटीक!

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  7. देश बचे बस, हम तो नित नित डूब रहे हैं।

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  8. जय हो भारत निर्माण के बाद होगी इंडिया शाइनिंग :)

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  9. भारत महिमा के साक्षात् दर्शन करा दिया आपने ..बेहतरीन

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  10. बहुत सटीक और सार्थक रचना !

    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest postअनुभूति : विविधा
    latest post वटवृक्ष

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  11. भाई वाह, करारा व्यंग.

    हो रहा भारत निर्माण

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  12. bahut sateek vyangy samsaamyik ghatnaaon par!!

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  13. बहुत खूब! वाकई बवाल है!

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  14. Bawal hai bawal hai lutere malamal hai
    Des ka paisa dakaarkar bante ye khushaal hai

    Janta ki kaun sune , janta trast aur behal hai
    kya khel, kya rail inka kya ghar kya jail.

    Thode din ki charcha hai fir pehle jaisa hal hai
    Bawal hai bawal hai.:-) :-) :-) .:-)

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  15. विभिन्न क्षेत्रों में चल रही राष्ट्रीय हलचल पर तीखी और सटीक रचना

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