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Thursday, March 7, 2013

राधे सांवरी होय


(1)
श्याम सजे
ज्यो गोपिका
धरा अनूठा रूप
सांवल तन
घूँघर मुखपर
लीला रची अनूप

(2)
टेसू भिगोया
केसर भिगोई
और पिसाई भांग
मोरपंख धर
राधा सजी ज्यों
मोहन घनश्याम

(3)
नित्य नवल
रास रचाए
राधे तेरो श्याम
फाग चढ़े
बौरा गया
सबरा गोकुलधाम

(4)
श्याम छवि निरख
राधे सांवरी होय
सांवरे के  तन पे 
रंग चढ़े ना कोय

9 comments:

  1. फागुन आ गयो रे ...........:)

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  2. टेसू भिगोया
    केसर भिगोई
    और पिसाई भांग
    मोरपंख धर
    राधा सजी ज्यों
    मोहन घनश्याम

    वाह फागुन आ गया है ... होली के रंग ओर राधा कृष्ण की मनुहार ... मनमोहक क्षणिकाएं सभी ..

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

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  4. बहुत ही कोमल और भक्ति भरी पंक्तियाँ..

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  5. कान्हा तो बस कान्हा है .....।
    भक्ति करो तो प्रेम उपजता है ,प्रेम करो तो भक्ति ....।

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  6. आनंदमय | जय श्री राधे |

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  7. बौरा गया सगळा गोकुल धाम !
    फागुन में राधा कृष्ण और प्रेम की मिठास और मौसम का एहसास एक साथ !
    बहुत खूब !

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  8. बहुत प्यारी पंक्तियाँ.

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