Pages

Thursday, November 25, 2010

मुझसे भी तो बाटों चाँद

पतला पतला काटों चाँद
मुझसे भी तो बाटों चाँद
ओस बन टपके आंसूं
ऐसे तो ना डाटों चाँद

सिन्दूरी सुबह कजरारी रात
अपना रंग भी छाटों चाँद

करवा चौथ पे तू भी देखे
इस धरती पर कितने चाँद

बरसे जो सिक्को की माफिक
बारातों में लूटो चाँद
लटके लटके थके नहीं तुम
कभी तो नभ से टूटो चाँद


30 comments:

  1. लटके लटके थके नहीं तुम
    कभी तो नभ से टूटो चाँद
    वाह क्या बात है। कल्पनायें भी कितनी दूर तक उडान भरती हैं। ाच्छी लगी कविता।शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  2. kya baat hai kya baat hai ...umdaa khayaal hain sabhi ke sabhi..bas ghazal kee bandishon men kaid ho jaate to dogune behtar ho jata hai ...fir bhi maza to bahut aaya... patla patla kaato chaand ..mujhse bhi to baanto chaand...waaah.. luvd it.....

    ReplyDelete
  3. @swapnil
    meri nazmein abhi kachhi hai ... jyada soch kar nahi likh paati ...padhne ka jayda time nahi milta ..yahi kami dikhti hai

    ReplyDelete
  4. सोच जरूरी सबसे ज्यादा,
    वो पास आपके सौ-सौ चाँद ...
    ग़ज़ल तकरीबन बहर के अंदर ,
    है दूर नहीं ये, कोसों चाँद,
    धीरे धीरे होगी मकम्मल,
    तब तक यही परोसो चाँद,

    जारी रखिये .... बाकी सब खुद ब खुद ही जगह पर आ जाएगा ....

    ReplyDelete
  5. @MAJAAL

    behad khoobsurat panktiyaan

    ReplyDelete
  6. बहुत खूबसूरत नज़्म ..
    लटके लटके थके नहीं तुम
    कभी तो नभ से टूटो चाँद
    पतला पतला काटो चाँद ...बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  7. chaand se manuhaar
    chaand se shikayat
    chaand kee chah ...... shabd shabd chaandni se

    ReplyDelete
  8. लटके लटके थके नहीं तुम
    कभी तो नभ से टूटो चाँद

    वाह क्या कल्पना है…………बहुत सुन्दर्।

    ReplyDelete
  9. sonal..iska ek hissa mujhe bhi chahiye..bahut sundar likha hai!

    ReplyDelete
  10. @parul

    home delivery hai apnki khidki pe aaj raat thik 8 baje...

    cheers!

    ReplyDelete
  11. 4.5/10

    कमाल के ख्याल .. :)
    उनकी उड़ान जारी रखिये
    रचना में नयापन है

    ReplyDelete
  12. सारा माहौल माहताबी हो गया। उत्कॄष्ट रचना।

    ReplyDelete
  13. चाँद पा लेने को सब हैं आतुर।

    ReplyDelete
  14. Beautiful as always.
    It is pleasure reading your poems.

    ReplyDelete
  15. दिलचस्प सोनल......खास तौर से ये लाइने .....

    पतला पतला काटों चाँद
    मुझसे भी तो बाटों चाँद

    and this one too....
    लटके लटके थके नहीं तुम
    कभी तो नभ से टूटो चाँद

    ReplyDelete
  16. सोनल जी!! नये ख़्याल से सजी ग़ज़ल(?)... थोड़ा तराश लेतीं (चाँद तराशने से फ़ुर्सत निकालकर)तो चार चाँद लग जाते... फिर भी शानदार हैं सारे अशार!!

    ReplyDelete
  17. Hi..

    Nazm main dekha humne tere..
    Harfon main tha utra chand..
    Ahsaason se man ke tere..dekha humne nikhra chand..

    Koi kahta daag hain usme,
    koi kahta raat ka chand..
    Chanda sa hi nirmal, sheetal,
    paya hai 'sonal' ka ka chand..

    I'm back.. Apni tippaniyon se aapko bore karne..

    Sundar nazm..

    Deepak..

    ReplyDelete
  18. aapki kavitao me apki soch ek dam hat ke jhalakti hai.

    sunder abhivyakti.

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर... सरल शब्दों में मोहक प्रस्तुति

    ReplyDelete
  20. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  21. पतला पतला काटों चाँद
    मुझसे भी तो बाटों चाँद

    wahhh..........!! by god kya thought hai...killer...!!!

    bohot bohot khoobsurat...too good

    ReplyDelete
  22. पतला पतला काटों चाँद
    मुझसे भी तो बाटों चाँद

    -बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    ReplyDelete
  23. करवा चौथ पे तू भी देखे
    इस धरती पर कितने चाँद
    वाह ... ये तो गज़ब की रचना है ... chaand के अनेकों अंजाद पढ़े हैं .. आपका अंदाज़ भी जुदा है ... बहुत खूब ....

    ReplyDelete
  24. मिल जाये अगर आपको चाँद
    थोडा टुकड़ा हमें भी दे दो चाँद ........अच्छी रचना

    ReplyDelete
  25. बेहतरीन अभिव्यक्ति...................

    ReplyDelete
  26. बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

    http://saaransh-ek-ant.blogspot.com

    ReplyDelete