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Saturday, October 1, 2011

आप तो सुपरवूमन हो -हे देवी माँ



हे देवी  माँ सच्ची अब लिमिट की भी लिमिट क्रोस हो गई है या तो हमें दे दो अष्टभुजा या हम भी चले नौ दिन के अनशन पर, आपके सामने से हटेंगे नहीं, एक तो आपकी मोहिनी सूरत ऊपर से शेर और इतने सारे शस्त्र (लाइसेंस है क्या ?) कोई इम्प्रेस नहीं होगा तो क्या होगा, लाइन तो लगेगी ही ना ,आप तो सुपरवूमन हो और अपन ठहरे आम भारतीय नारी सुबह से  मशीन की तरह जो स्टार्ट होते है रात बिस्तर पर  उल्लुओं और झींगुर को गुड नाईट बोलकर सोने जाते है कई बार चौकीदार भी दांत दिखाता है "मेमसाब आप तो जाग ही रही है कहें तो मैं थोड़ी देर झपकी मार लूं ".  दिन भर की चढ़ी मेकअप की परत के साथ नकली मुस्कान को भी उतार कर किनारे रखते है ..अगले दिन सुबह सुबह फिर जो चिपकानी होगी होंठों पर ,.. इतना टाइम नहीं होता हमारे पास कि जवाब दे सके "क्या हुआ?" "चेहरे पर बारह क्यों बजे है ","तबियत  ख़राब है क्या ".  अजी सरदर्द ,कमर दर्द,एसिडिटी  ये सब तो खाली बैठे  लोगों के शगल है ये राजरोग भोगने और आराम से सबको सुनाने लगे तो पहुँच गए बच्चे स्कूल और पतिदेव और हम ऑफिस. हम नॉन-स्टॉप चलते है कितनी बार पानी पी पी कर भेजा (इंजन ) ठंडा करना पड़ता है ,सच कह रही हूँ माँ कई बार बंद करने की कोशिश की पर इमोशनल धक्के मार मार कर स्टार्ट करवा दी गई. कुछ नहीं तो अपना शेर की भेज दो कुछ दिनों के लिए कितना गुर्राते है सब एक बार दहाड़ देगा ना मेरे फेवर में तो बॉस से बिग-बॉस तक सबकी बोलती बंद. मां अपनी ट्रिक हमारे साथ भी तो शेयर करो कैसे सारे के सारे आपके सामने सर झुका देते है और कान पकड़ कर खड़े रहते है जबकि आप तो बस मुस्कुराती रहती हो कुछ कहती भी नहीं और यहाँ हमने बोलने को मुहं खोला वहां सामने वाला कान बंद करके निकल लेता है. कुछ तो मैजिक  करती ही हो आप की एक झलक  के लिए पहाड़ चढ़ जाते है नंगे पैर दौड़े आते है दारु -चिकन मटन सब छोड़ देते है , यहाँ तो कहते कहते कलेंडर की तारीखे बदल गई पर कुछ नहीं होता कभी कभी लगता है सुबह की चाय की तरह हमारी चक चक की भी आदत पड़ गई है. अरे आप तो मुस्कुराने लगी सोच रही होंगी कितनी शिकायत करती है ये लड़की पर क्या करूं आपसे नहीं कहूँगी तो किससे कहूँगी पर प्रोमिस कीजिये हमारे सारे अकाउंट (प्रोब्लेम्स वाले ) इसी साल सेटल करेंगी और सिर्फ खुशिया की कैरीफॉरवर्ड होंगे टेंशन ,दुःख और आंसू नहीं आपको छ महीने की डेडलाइन देती हूँ वरना अप्रैल में पक्का बैठ जाउंगी अनशन पर अब अन्ना शीतकालीन सत्र का वेट कर सकते है तो मैं क्यों नहीं . 
http://epaper.inextlive.com/12985/INEXT-LUCKNOW/29.09.11#p=page:n=15:z=2

 


22 comments:

  1. बढिया है
    बहुत मजा आया पढते हुये

    प्रणाम

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  2. सही है, लगे रहो सफलता जरूर मिलेगी
    माँ मान ही जाएँगी

    बहुत मजेदार पोस्ट

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  3. आपको भी शुभकामनायें।

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  4. हा हा ... मजेदार व्यंग ... माँ जायंगी माँ ... भोली होती हैं बहुत ...

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  5. माँ लाईसेंस तो होगा ही... अच्छी डिमांड है

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  6. बहुत मजेदार पोस्ट| शुभकामनायें।

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  7. वाह वाह बहुत ही मज़ेदार्। ये भी देखियेगा………http://vandana-zindagi.blogspot.com

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  8. माँ अवश्य सुनेंगी अपने बच्चों की फ़रियाद!!

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  9. वाह बहुत मज़ेदार पढ़कर बहुत मज़ा आया सच अब तो कुछ करना ही पड़ेगा देवी माँ को :)
    समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  10. The more different are among them, in my point of view, Very well written and certainly a pleasure to get into a blog

    Funny Photo

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  11. आप शादीशुदा हैं, ये समाचार है मेरे लिए!
    सब ठीक हो जाएगा!
    आशीष
    --
    लाईफ़?!?

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  12. आपको छ महीने की डेडलाइन देती हूँ वरना अप्रैल में पक्का बैठ जाउंगी अनशन पर अब अन्ना शीतकालीन सत्र का वेट कर सकते है तो मैं क्यों नहीं . ...

    अच्छा व्यंग है ...

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  13. अच्छा व्यंग ,,,, मजेदार पोस्ट| शुभकामनायें।

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  14. सोनल जी,
    भारत की किसी भी भाषा में लिखें चाहे वो हिंदी हो, पंजाबी हो, गुजराती, मराठी, उर्दू, बंगाली या नेपाली में लिखने वाला विजेट अपने इस ब्लॉग के लेफ्ट बार में लगाएं साईज 250X250. विजेट प्राप्त करने के लिए इस इस लिंक पर कलिक करें

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  15. माता को वुमेन कहा.........नहीं उचित यह बात.....
    उलटी सीधी बात से...........भावों पर आघात......
    भावो पर आघात.............तथ्य मत तोड़ो मोड़ो....
    जिस पल जैसी रीति.........नीति उससे बस जोड़ो..
    कहि मनोज अरि देख अब......मत कर मां का जाप..
    निज मन देख टटोल कर........माता तो तू आप....

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  16. आपकी भक्ति-भावना से भरी प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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    जगजीत सिंह आधुनिक गजल गायन की अग्रणी है.एक ऐसा बेहतरीन कलाकार जिसने ग़ज़ल गायकी के सारे अंदाज़ बदल दिए ग़ज़ल को जन जन तक पहुचाया, ऐसा महान गायक आज हमारे बिच नहीं रहा,
    उनके बारे में और अधिक पढ़ें : जगजीत सिंह

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  18. :-)

    माँ सोच में पड़ी हैं........

    अनु

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  19. fine,funny, and full of humour ! bahut ruchikar !

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  20. बहुत खुब, बहुत अच्छा। आपकी भक्ति-भावना से भरी प्रस्तुति अच्छी लगी ।

    मैं एक Social worker हूं और समाज को स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां देता हुं। मैं Jkhealthworld संस्था से जुड़ा हुआ हूं। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप भी इस संस्था से जुड़े और जनकल्याण के लिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां लोगों तक पहुचाएं। धन्यवाद।

    HEALTHWORLD

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