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Monday, June 18, 2012

सुनो !मैं पढ़ रहा हूँ तुम्हे ...

सुनो !

तुमसे बात करना कविता लिखने जैसा है ..बेहद नाजुक बातें होती है तुमसे ...बातें नाजुक हां ...इन गुलाबी होंठो से खुदा ना करे कोई और बातें हो ..तो मैं कह रहा था तुमसे बात करना .....तुम्हारी उंगलिया अनजाने संगीत पर  ताल देती है हमेशा या तुम कीबोर्ड कुछ ना पढ़ी जा सकने वाली इबारत टाइप कर रही हो कई बार सोचा की पूछ ही लूं शायद बता दो पर रहने दो जिस दिन महाकाव्य पूरा होगा उस दिन तुम्हारे लबो से सुनूँगा..तसल्ली से ...ये जो आदत है ना तुम्हारी बातें करते हुए अपनी जुल्फों में उंगलिया फेरने की ,,मुझे बादलो में बिजली के तड़कने का एहसास देती है ..कभी आईने के सामने खड़े होकर जुल्फों में फसीं  इन उँगलियों को यूँभी देख लेना ....मुझसे बात करते करते अचानक जो मुस्कुराती हो वो मुस्कान हमेशा रहस्यों से भरी होती है ..एक दिन इस मुस्कराहट ...इन होंठों से जुड़े सारे रहस्य हल कर लूँगा मैं पढ़ रहा हूँ तुम्हे समझ रहा हूँ तुम्हे ...अगर समझ पाया तो ...कई बार ऐसा लगा मेरी बातों को समझने के लिए तुम्हे अपनी आँखों का सहारा लेना पड़ता है ...जब किसी बात पर ध्यान देते हुए तुम अपनी आँखे छोटी करती हो तो लगता है मेरे विचार अपनी आँखों के रास्ते खींच रही हो अपने दिमाग तक और समझ में आते ही फिर उसी आकार में लौट आती है तुम्हारी आँखे .... तुम्हे जब लगता है मैं तुम्हे नहीं सुन रहा मैं तब भी तुम्हे ही पढ़ रहा होता हूँ ..ना तुमसे निगाह हटती है ना किसी पल ख्यालों से तुम गायब होती हो ,कहा ना मैं तुम्हे पढ़ रहा हूँ ..जब तुम बेतकल्लुफी जताती हो और सामने कुशन के सहारे  अधलेटी  होकर बात कर रही होती हो ..तो तुम जानती हो मैं तुम्हारे जिस्म की लहर के साथ चढ़ उतर रहा हूँ ... मेरी नज्मो में जो नमक है वो तुमसे ही तो है उधार लिया है मैंने ...एक दिन इस नमक का क़र्ज़ अदा कर दूंगा ...उस दिन तक ..मुझे पढने दो..

28 comments:

  1. ्वाह ………खूबसूरत अहसास

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  2. सुनो!मैं पढ़ रही हूँ तुम्हे.............
    तुम्हारी पोस्ट पढ़ना मोहब्बत की किसी शायरी जैसा है...
    :-)

    lovely.........

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  3. baut tasalli si hui padh kar Sonal

    sunder

    abhaar

    naaz

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  4. बहुत बढ़िया !!!!

    "... मेरी नज्मो में जो नमक है वो तुमसे ही तो है उधार लिया है मैंने ..."

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  5. बला का खूबसूरत लिखा है सोनल !!!

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  6. बहुत खूबसूरत अहसास और उतना ही खूबसूरत अंदाज़-ए- बयां

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  7. beautiful metaphors, nice flow, liked it !!

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  8. लाजवाब प्रस्तुति ....

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  9. क्यों भारत के लोग अंग्रेजी को इतना महत्त्व देते हैं जब आपकी लेखनी ऐसा अहसास दिलाती है मानो अपनी आँखों के सामने ही कोई घटना घाट रही हो. लिखने का इतने अच्छे अंदाज़ के लिए बधाई स्वीकार कीजिये.

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  10. वाह ...बहुत खूब।

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  11. इस प्यार को तुम समझो न समझो ..... है तो

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  12. सोनल, न जाने क्यों मुझे लगता है कि ये वे विचार हैं जो एक स्त्री चाहती है उसका प्रेमी सोचे. मुझे नहीं लगता ये शब्द कभी पुरुष के हो सकते हैं. यदि हाँ तो किसी विरले पुरुष के.
    घुघूतीबासूती

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  13. एक दिन इस नमक का क़र्ज़ अदा कर दूंगा ...उस दिन तक ..मुझे पढने दो..

    एहसास बहुत खूबसूरती से उकेरे हैं .... बहुत सुंदर

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  14. सिर्फ सुनना ही तो सब कुछ नहीं , पढ़ तो रहा ही हूँ ....
    शायराना अंदाज़ !

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  15. कल 20/06/2012 को आपके ब्‍लॉग की प्रथम पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    बहुत मुश्किल सा दौर है ये

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  16. तुम्हे जब लगता है मैं तुम्हे नहीं सुन रहा मैं तब भी तुम्हे ही पढ़ रहा होता हूँ

    क्या बात...ख़ूबसूरत अहसासों से लबरेज़..

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  17. इस नमक का क़र्ज़ ... काश जिंदगी भर मेरी नज्मों में ये नमक घुला रहे ... मैं यूं ही कर्जदार रहूँ ...
    कमाल का प्रवाह ... बस पढता ही गया ...

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  18. बहुत सुंदर ढंग से भावों को अभिव्यक्त किया है.

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  19. बेहद शायराना अंदाज लिये खूबसूरत रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम

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  20. Tareef karne ka ye andaaz bhi badhiya hai.....

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  21. अंदाजे बयाँ काफी खुबसूरत है

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  22. क्या खूब , एक बार पढ़ा और पढ़ता चला गया ....
    काफी सुंदर अभिव्यक्ति ....

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