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Tuesday, November 20, 2012

मौन


सूरज भी मुश्किलों
 से उगा आज सुबह 
चिड़िया नहीं निकली
अपने  घोसलों से
बच्चे म्यूट मोड में
लगातार बिलखे
गाय दूध देने से
कर रही थी इनकार
तीन दिनों से
 ठहर -ठहर कर
वो भर रही थी सांस
इस घबराहट में
क्या पता खुदा
आक्सीजन की भी
सप्लाई रोक दे ...

19 comments:

  1. आह सोनल....
    साँस रुक ही गयी....

    अनु

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  2. उफ् ये मुश्किलें भी !!

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  3. ऐसा क्या हुआ . की प्रकृति की दिनचर्या भी थम गई ?

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. खुदा तो बेचारा क्या बंद करेगा .... हाँ मनुष्य ही कोई ऐसी तकनीकी ईज़ाद कर दे कि सब बंद हो जाये ... जब चाहे चालू और जब चाहे बंद ... बढ़िया व्यंग्य

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  6. :):)..सोनल व्यंग्य पर हाथ आजमाओ.जबरदस्त लिखा है.

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  7. बहुत बढ़ियाँ ...
    :-)

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  8. मौन प्रकृति का घातक होगा..

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  9. ये मुश्किलें ये उलझनें
    अरुन शर्मा - www.arunsblog.in

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  10. वाह प्रकृति तक स्तब्ध,
    लंबा ग्रहण पड़ा जैसे .

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  11. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 24/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  12. ऐसा ग्रहण न लगे कभी! .. सुन्दर अभिव्यक्ति ..
    सादर
    मधुरेश

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  13. वाह,क्या बात है

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  14. कितना भयावाह मौन है ये......

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  15. एक मौन ऐसा भी ....बहुत खूब ...चुप्पी जो दिल को छू गई

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  16. अच्छा है। वाह। खत्तरनाक मौन।

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