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Monday, January 9, 2012

तुम मुझे उम्मीद ला दो ..

(1)
तुम मुझे उम्मीद ला दो
है वही कम ज़िन्दगी में
आँखे मूंदे बैठे है कब से
अँधेरे या तेज़ रौशनी में
पड़ गए गहरे स्याह से
ख्वाब मेरे प्यार वाले 
जमा किये पल खोले जब भी
राख निकली पोटली में
तुम मुझे उम्मीद ला दो ..
(2)

जब गहन कुहासा छाया हो
और देर शाम सूरज ना दिखे
मन में सन्नाटा सडको सा
उदासी में ना उम्मीद दिखे
तब ढलती शाम की उगती धूप
एहसास दिलाने आती है
कितनी भी अंधियारी निशा रहे
पर सुबह जरूर आती है

24 comments:

  1. उम्मीद की नयी किरण

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  2. मन में सन्नाटा सडको सा
    उदासी में ना उम्मीद दिखे
    तब ढलती शाम की उगती धूप
    एहसास दिलाने आती है
    achchi shaeri ke liye shukriya

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  3. वाह दोनों ही रचनाएं बहुत सुंदर हैं

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  4. हर रात की सुबह होती ही है..

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  5. पड़ गए गहरे स्याह से
    ख्वाब मेरे प्यार वाले
    जमा किये पल खोले जब भी
    राख निकली पोटली में

    ....बहुत खूब...दोनों ही रचनाएँ लाज़वाब...

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  6. जमा किये पल खोले जब भी
    राख निकली पोटली में
    तुम मुझे उम्मीद ला दो ...behatarin

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  7. waah ...bahut khub likha hai aapne ....

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  8. Bahut khoob ..
    //पड़ गए गहरे स्याह से
    ख्वाब मेरे प्यार वाले
    जमा किये पल खोले जब भी
    राख निकली पोटली में

    waah..

    Kabhi waq mile to mere blog par bhi aaiyega.. :)
    http://palchhin-aditya.blogspot.com/

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  9. कितनी भी अंधियारी निशा रहे
    पर सुबह जरूर आती ह……………इसी उम्मीद पर तो दुनिया कायम है।

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  10. बहुत ही अच्छी क्षणिकाएं ...तुम मुझे उम्मीद ला दो ..

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  11. सार्थक प्रयास है आपका
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  12. आस की सुबह ज़रूर आयेगी

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  13. एक बेचारी उम्मीद और उस उम्मीद में उनकी इतनी बेरुखी ,
    उम्मीद को भी आघात लगता होगा.....

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  14. कितनी भी अंधियारी निशा रहे
    पर सुबह जरूर आती है
    ..sach..."every dark cloud has silver shine"
    ..sundar prastuti..

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  15. सुबह ज़रूर आयेगी/सुबह का इंतज़ार कर!!

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  16. Sach kaha hai ... Har Rabat ke baad subah jaroor ati hai ...umeed baki rahni chahiye ...

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  17. उम्मीद जगाती कविता...

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  18. वाह सोनल जी ..
    बहुत सुन्दर रचनाएँ..

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  19. उम्मीद जगाती कविता.बहुत सुन्दर रचना..
    कितनी भी अंधियारी निशा रहे
    पर सुबह जरूर आती है
    "उम्मीद की नयी किरण"

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