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Sunday, September 26, 2010

चलो मैं बे-वफ़ा हो जाती हूँ

इतनी नजदीकी अच्छी नहीं


चलो कुछ खफा हो जाती हूँ

अपना ही मज़ा है बेचैन करने का

चलो मैं बे-वफ़ा हो जाती हूँ



तेरे सामने आऊं भी नहीं

तुझे महसूस हर लम्हा रहूँ

मांगे तू भी साथ मेरा शिद्दत से

चलो मैं खुदा सी हो जाती हूँ



कब तक नशीली रात सी रहूँ

होंठो पे छिपी बात सी रहूँ

जान जाए ये ज़माना मुझको

चलो चटख सुबह सी हो जाती हूँ



जितना जानो उतना उलझ जाओ

इतना उलझो ना सुलझ पाओ

ना जाने किस वक्त ज़रुरत पड़े

चलो मैं दुआ सी हो जाती हूँ



कभी देखो तो अनजान लगूं

कभी दिल की मेहमान लगूं

एक झलक देख लो तो दीवाने हो जाओ

चलो मैं उस अदा सी हो जाती हूँ

46 comments:

  1. nice to be here!
    keep writing!.....all the best
    regards,
    sanjay

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  2. वाह जी क्या बात है...हर सोच में अदा है आपकी तो.

    सुंदर अभिव्यक्ति.

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  3. bahut pyaree shoukh chanchal see kavita.....

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  4. कब तक नशीली रात सी रहूँ

    होंठो पे छिपी बात सी रहूँ

    जान जाए ये ज़माना मुझको

    चलो चटख सुबह सी हो जाती हूँ

    वाह ..खूब चटख रंग बिखेरे हैं ...सुन्दर ..

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  5. ये अदा बड़ी अच्छी है ...चलो आशिक सा हो जाता हूं

    दिल को छू गई आपकी ये रचना...बेहतरीन

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  6. बेहद उम्दा रचना ! बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  7. दिल को छू गई आपकी ये रचना...बेहतरीन

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  8. बड़ी दमदार अठखेलियाँ आपके प्रेमाभिव्यक्ति की।

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  9. bahut khub ...चलो चटख सुबह सी हो जाती हूँ

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  10. क्या बात है..गजब!

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  11. bahut hi khubsurat...

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  12. बहुत बार आपकी रचनाएँ देखी, पढ़ीं पर टिप्पणी नहीं कर पाया, इस बार बिना किये नहीं जाऊँगा

    चलो मैं उस अदा सी हो जाती हूँ

    इस आखिरी पंक्ति में सब कुछ कह दिया है आपने. सब कुछ हो जाना चाहती है वह उसके प्यार में.... बहुत ही सुन्दर


    मेरे ब्लॉग पर भी पधारियेगा.

    manojkhatrijaipur.blogspot.com

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  13. jab bhi padhti hoon
    tumhari ishqkiya nazm
    bas main bhi
    'waah waah' si ho jati hoon :)
    keep going!!

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  14. इतने सलीके से,
    क़त्ल करना सीखे आपसे कोई,
    गोया नज्में कह रही हो,
    ३०२ दफा हो जाती हूँ !

    लिखते रहिये ...

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  15. सोनल बहुत खूब । दिल को छू गयी रचना। बधाई।

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  16. बहुत सुन्दर रचना।

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  17. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 28 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  18. कब तक नशीली रात सी रहूँ

    होंठो पे छिपी बात सी रहूँ

    जान जाए ये ज़माना मुझको

    चलो चटख सुबह सी हो जाती हूँ
    वाह..क्या पंक्तियां है...सुंदर अभिव्यक्ति

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  19. बेहद उम्दा रचना ! बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  20. इतनी नजदीकी अच्छी नहीं


    चलो कुछ खफा हो जाती हूँ

    अपना ही मज़ा है बेचैन करने का

    चलो मैं बे-वफ़ा हो जाती हूँ

    khatarnak irade rakhti hain aap to .. :D

    badhiya rachna hai

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  21. शरारत करना कोई आपसे सीखे। तरसा तरसा के प्यार करती हैं आप।

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  22. माशूक़ तो वैसे भी आशिक़ का ख़ुदा होती है, और रात भी, भोर भी, और दिखाती है वो अदा भी जो दीवाना बना दे, और बेवफ़ाई तो सचमुच दीवाना कर देती है..लिहाजा ये ग़ज़ब न करना आप. वर्ना कहीं ख़ुद ही रास्तों पे न चिल्लाना पड़े कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को..
    अच्छी कविता, हर बार की तरह!!

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  23. तेरे सामने आऊं भी नहीं
    तुझे महसूस हर लम्हा रहूँ
    महसूस तो उसी को किया जा सकता है जो सामने न हो. महसूसने की हद तक हो जाने की सुन्दर तमन्ना है इस सुन्दर रचना में.

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  24. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  25. अपना ही मज़ा है बेचैन करने का
    बहुत खूब!

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  26. आप आजकल है कहां


    खैर... शायद वयस्तता चल रही हो

    हां... रचना अच्छी है हमेशा की तरह बोले तो भन्नाट और झकास

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  27. सही कहा आपने ..आप कुछ भी हो सकती हो
    कविता का प्रवाह बहुत सुन्दर रहा और भाव बहुत रंग बिरंगे

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  28. is rachna ke bhav bahut achchhe hain Sonal ji... tippani kiye bina nahi raha gaya.

    badhai sweekaren

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  29. वाह...बहुत खूब !!!

    सचमुच इसी से तो प्रेम और अनुपम लगने लगता है...
    बहुत मोहक भावाभिव्यक्ति...

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  30. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द लिये हुये भावमय प्रस्‍तुति ।


    चर्चा मंच का आभार इस प्रस्‍तुति को पढ़वाने के लिये।

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  31. Bahut sunder aur dil ko choo lene wali ada bhari kavita. bahut badhai

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  32. अच्छी कविता लिखते रहिये ।

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  33. जितना जानो उतना उलझ जाओ

    इतना उलझो ना सुलझ पाओ

    ना जाने किस वक्त ज़रुरत पड़े

    चलो मैं दुआ सी हो जाती हूँ
    सुन्दर पंक्तियाँ हैं :)

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  34. कभी देखो तो अनजान लगूं
    कभी दिल की मेहमान लगूं
    एक झलक देख लो तो दीवाने हो जाओ
    चलो मैं उस अदा सी हो जाती हूँ

    वाह ... क्या लाजवाब सी अदा है आपकी ... ये रचना भी तो एक तरह की अदा ही है .... बहुत अच्छी प्रस्तुति ...

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  35. जितना जानो उतना उलझ जाओ

    इतना उलझो ना सुलझ पाओ

    ना जाने किस वक्त ज़रुरत पड़े

    चलो मैं दुआ सी हो जाती हूँ

    itni khubssorat line ki me to bewafa hi ho gaya

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  36. ================================
    मेरे ब्लॉग पर इस बार थोडा सा बरगद..
    इसकी छाँव में आप भी पधारें....

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  37. बहुत सुन्दर..............

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  38. Sonal Ji,
    Achcha khayal hai ruthne ka aur phir khud hi suljaane ka ..... Badiyaa hai
    कभी देखो तो अनजान लगूं

    कभी दिल की मेहमान लगूं

    एक झलक देख लो तो दीवाने हो जाओ

    चलो मैं उस अदा सी हो जाती हूँ
    Surinder Ratti
    Mumbai

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  39. कभी देखो तो अनजान लगूं

    कभी दिल की मेहमान लगूं

    एक झलक देख लो तो दीवाने हो जाओ

    चलो मैं उस अदा सी हो जाती हूँ .... bahut roomaanee !

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  40. bohot bohot bohot cute si nazm hai, ekdum pyaari si...:)

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  41. ye woh hai jo khud banti hai andar se aati hai..great one!

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  42. बहुत सुंदर रचना हैं ।

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