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Saturday, March 3, 2012

बैरी साजन बैरी फागुन ..


बैरी साजन
बैरी फागुन
स्वांग रचाए
नित नित मो से
क्षण में  तपे
क्षण में बरसे
सौं धराये
नित नित मो से
ना वो माने
ना मैं हारी
रंग चढ़ाए
नित नित मो पे
वो मुस्काये 
तो मैं बलि जाऊं
मान कराये
नित नित मो से
बैरी साजन
बैरी फागुन ....

19 comments:

  1. बेहद उम्दा भाव ... बढ़िया रचना ... बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  2. :-)
    बहुत सुन्दर...
    बैरी साजन..बैरी फागुन...दोनों के रंग में रंग जायें

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  3. होली की खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  4. सुन्दर अभिवयक्ति..

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  5. मान कराये
    नित नित मो से
    क्या बात है...बड़ी प्यारी रचना है

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  6. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  7. sunder ,rang se saji rachna.........

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  8. होली का रंगा चढ़ा हुआ है..

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  9. अरे क्या बात है ..फागुन चढ ही गया है.

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  10. "वो मुस्काये
    तो मैं बलि जाऊं
    मान कराये
    नित नित मो से
    बैरी साजन
    बैरी फागुन ...."
    होली के रंग में डूबी, प्यार-मनुहार भरी प्यारी कविता।

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  11. rangon ki fuhaar si pyaari rachna.

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  12. फागुन तो झुलाता है मन को ... रंगों को खिलाता है जीवन में ...
    भाव पूर्ण रचना है ...

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  13. वाह!
    आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 05-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  14. होली के रंग...अपने साजन के संग ......बहुत खूब

    होली की शुभकानाएं

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  15. "प्यारी सी"
    "होली की खुमारी सी"
    रचना पढ़ कर बहुत अच्छा लगा...
    बहुत सी शुभकामनाएँ होली की...

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