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Tuesday, January 18, 2011

उसकी आँखें


उसकी आँखें
गहरी आँखें
दरवाजे पे
ठहरी आँखे
बरस बीते
अबतक सीली
तारो सी
रुपहली आँखें
दिलतक आई
मैंने पाई
प्यार भरी
रसीली आँखें
आँखों में
अबतक ज़िंदा है
दर्द पगी
पनीली आँखें 


 

18 comments:

  1. ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

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  2. ्वाह! गज़ब ! बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  3. अच्छी रचना है.
    " आँखों में
    अबतक ज़िंदा है
    दर्द पगी
    पनीली आँखें"

    बहुत बढ़िया.

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  4. आँखों में
    अबतक ज़िंदा है
    दर्द पगी
    पनीली आँखें
    वाह!! बहुत खूब

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  5. उसकी आँखें
    गहरी आँखें
    दरवाजे पे
    ठहरी आँखे


    खूबसूरत कविता !

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  6. वाह! बहुत सुन्दर!

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  7. भूल सकता है भला कौन ये न्यारी आँखें!!

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  8. दरवाजे पे
    ठहरी आँखे
    awwwesome....!!

    बरस बीते
    अबतक सीली

    bohot bohot bohot sweeet si, just super lovely nazm dear....luv u

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  9. अति सुन्दर सोनल जी
    अभिवादन सहित
    साजिद उस्मानी

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  10. वह .. क्या बात है ... तेरी आँखों के सिवा दुनिया में ...
    सुंदर कविता ...

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  11. कहूँ आज क्या, शब्द नहीं हैं,
    रोना पर प्रारब्ध नहीं है,
    मन से मन को बाँधे बैठे,
    शेष जगत उपलब्ध नहीं है?

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  12. bouth he aacha post hai aapka ... read kar ke aacha lagaa ji..

    Dear Friends Pleace Visit My Blog Thanx...
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  13. पनीली आँखें..क्यों?? बहुत सुन्दर कविता.

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  14. Sunder kavita k liye badhai....
    http://amrendra-shukla.blogspot.com

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  15. aankhon ke raaj.....aur aapkaa bayaan.... kyaa baat...kyaa baat....kyaa baat....

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