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Tuesday, June 28, 2011

सलवटें चेहरे पर

सलवटें चेहरे पर
साफ़ नज़र आती है
करवट बदलकर
जब रात गुज़र जाती है
दिल को निचोड़ते है 
ख़ामोशी के  जोर से
आँखों की कोरों पर
बूँद छलक जाती है
सुलगती है सांसें
चारो पहर रात दिन
दर्द की स्याही चेहरे पर
यूँही तो नहीं उभर आती है
झटक कर दूर करते है
तेरा साया तेरी यादें
तस्वीर मेरी अक्सर
मुझपे ही बिफर जाती है 

26 comments:

  1. दर्द की स्याही उभरने के लिए
    सोच को जिन्दा और
    खुद को मरना पड़ता है |
    शायद,
    इश्क करना पड़ता है --

    (कृपया दिल पर न लें,
    तुरंत, जो ध्यान आता है
    लिखा जाता है )

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  2. बहुत सुन्दर भाव भरे हैं।

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  3. सोनल जी! इसे कहते हैं दर्द का स्केच!!

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  4. दिल को निचोड़कर भाव भरे जाएँगी तो ऐसी शानदार रचनाएँ ही सामने आएँगी - बधाई

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  5. bhavpravan kavita....uttam rachana

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  6. वाह ... क्या बात है ... बहुत खूब !!

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  7. वक्त की या दर्द की सलवटें।

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  8. टपक पड़ते हैं आंसू
    आंखों के कोर से
    दिल को निचोड़ते जब
    खामोशी के शोर से

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  9. मन की पीड़ा छलका दी है ..

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  10. bahut accha sonal ji

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  11. ओह हो हो तो तुम लय बद्ध नज़्म भी गज़ब की लिखती हो.

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  12. ‘सलवटें चेहरे पर साफ नज़र आती हैं
    करवटें बदलकर जब रात गुज़र जाती है’

    क्या बात है...बहुत सुन्दर रचना

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  13. सुन्दर कविता

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  14. muddat baad online aayi hoon....aur jaisa mood tha, bilkul vaisi nazm padhne ko mil gayi.....mmmuuuaahhhhhhh.......luv u

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  15. hmmmm

    dard ubhar hi aata hai lavzon mein aksar

    Naaz

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  16. तस्वीर मेरी अक्सर
    मुझपे ही बिफर जाती है

    क्या खूब कहा है....

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  17. nice....bahut sundar rachna.....

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  18. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल ३० - ६ - २०११ को यहाँ भी है

    नयी पुरानी हल चल में आज -

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  19. सच कहा कभी-कभी रात यूं ही गुजर जाती है....
    खूबसूरत भाव....

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  20. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  21. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
    नयी पुरानी हलचल

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  22. आपकी इस कविता ने मन को मोह लिया है और कुछ भीगा सा कही रुक सा गया है .. बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति ,...

    आभार

    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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