अबकी दिवाली ना जाए खाली
मुझको तारो से सजा दो
तारे गर हो दूर बहुत तो
दो चार हीरे ही तुम ला दो
दीप सजे तो रात सुनहरी
दीपमालिका मुझे बना दो
लौ से मैं कहीं झुलस ना जाऊं
सोने के कंगन गड़वा दो
जगमग जगमग हर घर आँगन
द्वार द्वार पर सजी रंगोली
रंग अगर मिटने डर हो
सतरंगी चूनर दिलवा दो
जितना चाहूं उतना पाऊं
जितना पाऊं उतना चाहूं
बनी रहूँ मैं तेरी प्रेयसी
ऐसा कुछ मंतर पढवा दो