कई साल पहले ...लिखी थी ये ..किसी ख़ास के लिए
एक रोज़ मैंने सोचा तुमको एक rose दूं मैं
पर दिल मेरा बोला क्यों रोज़ rose दूं मैं
एक रोज़ rose लेकर तुम ज़िन्दगी में आओ
मैं तो चाहू हर रोज़ rose लाओ
पर आज rose day है मेरा है तुमसे कहना
मेरी ज़िन्दगी में हर रोज़ फ्रेश rose बनकर रहना ....