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Monday, February 7, 2011

कई साल पहले ...लिखी थी ये ..किसी ख़ास के लिए

एक  रोज़  मैंने  सोचा  तुमको  एक  rose   दूं  मैं
पर  दिल   मेरा  बोला  क्यों  रोज़  rose दूं  मैं
एक  रोज़  rose लेकर  तुम  ज़िन्दगी में आओ
मैं  तो  चाहू  हर  रोज़  rose लाओ
पर  आज  rose day है  मेरा  है  तुमसे  कहना 
मेरी  ज़िन्दगी  में  हर  रोज़  फ्रेश  rose बनकर  रहना ....