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Friday, December 23, 2011

तुमको मेरी याद आएगी ?


कुहासे की शीतल छुअन के साथ
साँसों की सुलगी  तपन के साथ
ये रुत भी बीत जायेगी
तुमको मेरी याद आएगी ?

चाय की चुस्की के साथ
बर्फीली हवा की घुड़की के साथ
जब सन्नाटी रात सताएगी
तुमको मेरी याद आएगी ?

गुलाबी से मौसम नीला होगा
गालो का रंग जर्द पीला होगा
आँखे भाप से धुन्ध्लायेगी
तुमको मेरी याद आएगी ?

Monday, October 5, 2009

दोपहर

एक सुस्त दोपहर में लेते हुए जम्हाइयां

करते है कोशिश ढूढने को  अपनी परछाइयां 
मन वैसा रीता -रीता सा जैसी  सूनी है सड़के
झुलस न जाए तपिश से धुप में पड़े सपने
तेज धुप से चुन्ध्याती आँखें दुखने लगती है
जब नींद  आती है तो पलके झुकने लगती है
है कैसे लम्बे लम्बे दिन और कैसे जलते तपते दिन
कैसे बीते तन्हाई में बोलो साजन तेरे बिन
तुम बाँहों में जो ले लो तो थोडी सी ठंडक पड़ जाए
सो जाऊं मैं चैन से ये गर्म दोपहर कट जाए