काका बौराते फिरे
काले करके बाल
कोई नवयौवना
रंग दे अबके साल
बत्तीसी सेट किये
काकी रही मुसकाय
फागुन सजी फुहार
देवर नाही आय
ससुराल साली बसे
वे जीजा मालामाल
पास पडोसी ताक रहे
दिल में बड़ा मलाल
फ़गुआये भये बावरे
खूब चढ़ाई भांग
चुनर ओढ़ बाबा रचे
नार नवल का स्वांग
जो रोये सो रो रहे
जो गाये सो गाये
नौटंकी घर घर सजी
कौन किसे समझाए
कोई छेड़े राग भैरवी
कोई छेड़े राग मल्हार
होली है में डूब गया
सारा सुर संसार

