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Tuesday, May 21, 2013

बवाल है बवाल है !

बवाल है बवाल है
बड़ा अजब हाल है
लापता से तंत्र में
ये कौम बेहाल है

पटरी से उतर गई
मालामाल कर गई
मामा की रेल है 
भांजा निहाल है

राष्ट्र के गले पड़े
राष्ट्रीय दामाद है
मौन है सारे देवता 
खुजली है खाज है 


नेता भी भीतर है
अभिनेता भी जेल में
भारतीय कारागार अब
राष्ट्रीय ससुराल है

बैट बॉल छोड़कर
गड्डियों का खेल है
खेल खिलाडियों का
अब ठिकाना जेल है

सबके बंद कान है
जनता हैरान है
समझ लो भैया ये
भारत निर्माण है

Thursday, March 14, 2013

सुनो ! भारत भाग्य विधाताओ


सुनो !
भारत भाग्य विधाताओ
शहीदों की चिताओं से
दूर रखना काले हाँथ
कलंकित करेंगे शहादत ,

तुम्हारे शरीर से उठती
सड़ांध दम घोट देगी
उनकी आत्माओ का
तुम तुष्टिकरण में रहो
देसी विदेसी आकाओं के

ना तुम्हारा आँगन रोया
ना सूनी हुई तुम्हारी देहरी
तुम बस गिनो गिन्नियां
बंद आँखों से लगातार
लथपथ चेहरे मत देखो

हम फिर सौंप देंगे
तुम्हारे हाँथ बागडोर
अपने भविष्य की
क्योंकि खो चुके है
अपनी आवाज़ शक्ति
और
स्व:

Thursday, February 7, 2013

सारा टाइम काँय-काँय



फलाना बैंड नहीं चलेगा
ढिमाकी फिल्म नहीं चलेगी
कला प्रदर्शनी नहीं चलेगी
ये लेखक नहीं चलेगा
वो निर्देशक नहीं चलेगा
तू बोला तो क्यों बोला
मुंह खोला तो क्यों खोला
ऐसे कपडे नहीं चलेंगे
पुतले पुतली रोज जलेंगे
ख़बरों के छोटे टुकड़े कर
ब्रेकिंग न्यूज़ में रोज़ तलेंगे 
इसके विचार  हाय हाय
उसका घर बार हाय हाय
फुर्सत कितनी इनको देखो
सारा टाइम काँय-काँय-काँय-काँय

Tuesday, January 22, 2013

पधार रहे है .........


खबरदार होशियार
सियारों के सरदार
ऐय्यारों के ऐय्यार
करने  बंटाधार
पधार रहे है .......
 

बहरूपिये हज़ार
रंगे  सियार
लूटने को बेकरार
फिर एक बार
पधार रहे है .......
 

छुपे हथियार
खूं के तलबगार
तमाशेबाज़ ज़ोरदार
वोट मांगने द्वार-द्वार
पधार रहे है .........