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Friday, September 13, 2013

राम ढूंढना रावण में

बैलट बुलेट की छावन में
मेला लगेगा गांवन में
राह हमारी जो पाहुन भूले
नित पधारेंगे आँगन में
भोपू जोर जोर  बजेंगे
हांथी के दूजे दांत दिखेंगे
बरसाती मेढक निकलेंगे
बिन बारिश इस सावन में
भोरे भोरे आन घुसेंगे
देहरी देहरी नाक घिसेंगे
मिश्री वाले बोल बोलकर
आन गिरेंगे पाँवन में
नोट उड़ेंगे वोट बिकेंगे
जात पात पर खूब बकेंगे
नहीं जो संभले डूब गिरेंगे
कागज़ की इन नावन में  
खूब परखना जांच के रखना
सुनना सबकी मनकी करना
बड़ा कठिन है काज भैया
राम ढूंढना रावण में

Tuesday, May 21, 2013

बवाल है बवाल है !

बवाल है बवाल है
बड़ा अजब हाल है
लापता से तंत्र में
ये कौम बेहाल है

पटरी से उतर गई
मालामाल कर गई
मामा की रेल है 
भांजा निहाल है

राष्ट्र के गले पड़े
राष्ट्रीय दामाद है
मौन है सारे देवता 
खुजली है खाज है 


नेता भी भीतर है
अभिनेता भी जेल में
भारतीय कारागार अब
राष्ट्रीय ससुराल है

बैट बॉल छोड़कर
गड्डियों का खेल है
खेल खिलाडियों का
अब ठिकाना जेल है

सबके बंद कान है
जनता हैरान है
समझ लो भैया ये
भारत निर्माण है

Tuesday, January 22, 2013

पधार रहे है .........


खबरदार होशियार
सियारों के सरदार
ऐय्यारों के ऐय्यार
करने  बंटाधार
पधार रहे है .......
 

बहरूपिये हज़ार
रंगे  सियार
लूटने को बेकरार
फिर एक बार
पधार रहे है .......
 

छुपे हथियार
खूं के तलबगार
तमाशेबाज़ ज़ोरदार
वोट मांगने द्वार-द्वार
पधार रहे है .........