कुछ वियोगी मन हुआ
तन भी ना अब साथ दे
कोई ऐसा पल नहीं
जो मन को मेरे साध दे
साध मन की थी कभी
खुशिया सराहे फिर मुझे
बुझ गए आंसू में सब
दीप जितने थे जले
मुश्किल हूँ मैं
या वक़्त मुश्किल है मेरा
मिलता भी नहीं कभी
जब साथ मांगती हूँ तेरा
मैं इतनी बुरी ना थी
पर भली कब तक रहूँ
मन है पीड़ा से भरा
दर्द अब किससे कहूं
क्या कभी होगा प्रलय
टूट कर बह जाउंगी
मैं अपने जीवन का
अवशेष मात्र रह जाउंगी
नेह की बूंदे कभी कुछ
मुख पे मेरे डाल दे
बहुत बिखरी हूँ प्रिये
तू ही मुझे संवार दे
मैं क्या सोचती हूँ ..दुनिया को कैसे देखती हूँ ..जब कुछ दिल को खुश करता है या ठेस पहुंचाता है बस लिख डालती हूँ ..मेरा ब्लॉग मेरी डायरी है ..जहाँ मैं अपने दिल की बात खुलकर रख पाती हूँ
Tuesday, August 10, 2010
Saturday, August 7, 2010
ये सावन मन भाये ना ...
ये सावन
मन भाये ना
बदरा तुमको
लाये ना
दूर बिदेस में
बैठे तुम
सौतन कहीं
लुभाए ना
बाट निहारे
नैन दुखे
पीर हमारी
कौन सुने
काली आँखे
काली रात
उसपर उस
डायन की घात
मन तो
ऐसा ऐसा है
जाने
कैसा कैसा है
कोई टोना
डाल ना दे
तुमको मुझसे
टाल ना दे
जितनी डाह
है प्रेम में
उतना तो
अगन जलाये ना
मन भाये ना
बदरा तुमको
लाये ना
दूर बिदेस में
बैठे तुम
सौतन कहीं
लुभाए ना
बाट निहारे
नैन दुखे
पीर हमारी
कौन सुने
काली आँखे
काली रात
उसपर उस
डायन की घात
मन तो
ऐसा ऐसा है
जाने
कैसा कैसा है
कोई टोना
डाल ना दे
तुमको मुझसे
टाल ना दे
जितनी डाह
है प्रेम में
उतना तो
अगन जलाये ना
Wednesday, August 4, 2010
अबकी बारिश में क्या क्या होगा
अबकी बारिश में क्या क्या होगा
हर कदम पर गड्ढा बना होगा
मौत को खुला आमंत्रण है
कदम कदम पे मेनहोल खुला होगा
घरो में नलों की टोटिया सूखी
सडको पे नदी- नालो का समां होगा
फ़रियाद करोगे भी तो किससे
प्रशासन तो सो रहा होगा
करनी पे शायद पछताए
भ्रष्ट नेता सुधर जाए
आज दिल्ली में खुला है पाताल का रास्ता
कल हर गली में खुला होगा
हर कदम पर गड्ढा बना होगा
मौत को खुला आमंत्रण है
कदम कदम पे मेनहोल खुला होगा
घरो में नलों की टोटिया सूखी
सडको पे नदी- नालो का समां होगा
फ़रियाद करोगे भी तो किससे
प्रशासन तो सो रहा होगा
करनी पे शायद पछताए
भ्रष्ट नेता सुधर जाए
आज दिल्ली में खुला है पाताल का रास्ता
कल हर गली में खुला होगा
Monday, August 2, 2010
चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंने
हर सुबह आईने से
मुखातिब होता हूँ
किसी रोज़ तो
सही सूरत दिखलायेगा
चेहरे पे चेहरा
चढ़ाया है मैंने
एक रोज़ तो
ये उतर जाएगा
जो कहता है मुझसे
मैं सबसे भला हूँ
उसी का बुरा अक्सर
मैंने किया है
जो आया मरहम
की उम्मीद लेकर
बड़ा जख्म उसको
मैंने दिया है
हमेशा तो मेरी
ये फितरत नहीं थी
इस शहर ने शायद मुझे
कुछ और बना दिया है
Thursday, July 29, 2010
रात अधूरी ....
चिंदी चिंदी
टुकड़ा टुकड़ा
रात को जोड़ा
चाँद को पकड़ा
रूठा रूठा
हाथ से छूटा
वो भूरा
बादल का टुकड़ा
कुछ बड़े
तारे चिपकाए
कुछ छोटे
यूँही छितराए
रात की रानी
मांग के लाये
काजल भरकर
नैन जलाये
लोरी गाकर
जग सुलाया
बनी प्रेयसी
तुझे बुलाया
अब काहे
मीलों की दूरी
आओ तुमबिन
रात अधूरी
टुकड़ा टुकड़ा
रात को जोड़ा
चाँद को पकड़ा
रूठा रूठा
हाथ से छूटा
वो भूरा
बादल का टुकड़ा
कुछ बड़े
तारे चिपकाए
कुछ छोटे
यूँही छितराए
रात की रानी
मांग के लाये
काजल भरकर
नैन जलाये
लोरी गाकर
जग सुलाया
बनी प्रेयसी
तुझे बुलाया
अब काहे
मीलों की दूरी
आओ तुमबिन
रात अधूरी
Monday, July 26, 2010
एक डुबकी गंग धार में
एक डुबकी गंग धार में
कांवर के त्यौहार में
तन मन सब धुल जाए
हर हर गंगे हो जाए
सावन के उस मेले में
मन भर पाओ धेले में
सारा आँचल भर जाए
जय बम भोले हो जाए
दूध दही और शहद
धतूरा भांग और मृग-मद
बेलपत्रि सी चढ़ जाऊं
शायद मैं भी तर जाऊं
घर से इतनी दूरी है
ऐसी ही मजबूरी है
चुल्लू भर आचमन लिया
शायद मैं भी तर जाऊं
कांवर के त्यौहार में
तन मन सब धुल जाए
हर हर गंगे हो जाए
सावन के उस मेले में
मन भर पाओ धेले में
सारा आँचल भर जाए
जय बम भोले हो जाए
दूध दही और शहद
धतूरा भांग और मृग-मद
बेलपत्रि सी चढ़ जाऊं
शायद मैं भी तर जाऊं
घर से इतनी दूरी है
ऐसी ही मजबूरी है
चुल्लू भर आचमन लिया
शायद मैं भी तर जाऊं
Saturday, July 24, 2010
लिखो ना.......(2)
लिखो ना.......
महका बेला
बिखरा काजल
हुई पिया की
बहका आँचल
लिखो ना ....
मधुमास में
मधुमय रातें
प्रेम पगी थी
मीठी बातें
लिखो ना.....
लड़ना चिढना
और रुलाना
देना ताने
फिर मनाना
लिखो ना .....
कितने पल
कितनी बातें
हमने बांटी
कितनी सौगातें
प्रेम तुम्हारा
साथ तुम्हारा
मुझपर ये
विश्वास तुम्हारा
एक सम्मोहन
एक आकर्षण
कर डाला
सबकुछ अर्पण
इतना प्यार
संवर गई मैं
लिखा ह्रदय पर
नाम तुम्हारा
महका बेला
बिखरा काजल
हुई पिया की
बहका आँचल
लिखो ना ....
मधुमास में
मधुमय रातें
प्रेम पगी थी
मीठी बातें
लिखो ना.....
लड़ना चिढना
और रुलाना
देना ताने
फिर मनाना
लिखो ना .....
कितने पल
कितनी बातें
हमने बांटी
कितनी सौगातें
प्रेम तुम्हारा
साथ तुम्हारा
मुझपर ये
विश्वास तुम्हारा
एक सम्मोहन
एक आकर्षण
कर डाला
सबकुछ अर्पण
इतना प्यार
संवर गई मैं
लिखा ह्रदय पर
नाम तुम्हारा
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