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Friday, February 25, 2011

मैं जितना पास आउंगी तुम उतना ज़ुल्म ढाओगे

मुझे उम्मीद है तुमसे
के मेरा दिल दुखाओगे
मैं जितना पास आउंगी
तुम उतना  जुल्म ढाओगे
मेरे सपने मेरी बातें
तुम्हे फ़िज़ूल लगते है
बिछा दूं फूल जितने भी
तुम्हें बबूल  लगते है
मिलता है सुकूं तुमको
बहे जो दर्द  आँखों से
सदियों से हुआ गायब
रूमानी चाँद  रातों से
बचे जो आस  के तारे
फूंककर उन्हें बुझाओगे
मेरे लिखे वो महके ख़त
अपने हांथों से जलाओगे
मैं जितना पास आउंगी
तुम उतना ज़ुल्म ढाओगे


Saturday, February 19, 2011

अपनी चाहत पा जाउंगी

आज फिर मैं वही सवाल पूछूंगी
जानती हूँ जवाब क्या आएगा
नए जबाब की चाहत में
वही साल दर साल पूछूंगी
मैं नहीं थकूंगी मांगने से
ना मांगू तो क्या पा जाउंगी
रीती थी तब भी मैं
अब भी रीती रह जाउंगी
सजदा सुबह शाम करो
तो माथे पर भी निशा पड़ते  है
टूटते है जितने ख्वाब
सब मेरे तलवो पे आके गड़ते हैं
ना सजाऊं अगर ख्वाब नए
क्या लहूलुहान होने से बच जाउंगी
जो पाना है वो बहुत मुश्किल है 
पर ज़माने को आसानी से हासिल है  
लगता है इस बार की कोशिश में
अपनी चाहत पा जाउंगी

Tuesday, February 15, 2011

जली फिर रात रूमानी....

थी कल की शाम रूमानी
छलकता जाम रूमानी
निगाहे थी निगाहों तक
नज़र  की प्यास रूमानी
सहेजा भी संभाला भी
सीने से दिल निकाला भी
नहीं था सुर्ख इतना कुछ
जली  फिर रात रूमानी
अजब हालात थे शायद
मेरे जज्बात थे शायद
ना तुम बोले ना मैं बोली
चुपी ना रात रूमानी
कहें कैसे सुनें कैसे
ये किस्से प्यार वाले है
बहुत मीठे है गुड जैसे
यहाँ जितने निवाले है
तुम्हे पाया तो पा बैठी
मैं ये सौगात रूमानी

Tuesday, February 8, 2011

सखि बसंत मादक अधिक...


सखि बसंत मादक अधिक ,करू मैं कौन  उपाय
जिन कारण मैं बावरी ,वो मोहे मिल जाए

उपवन में उत्सव रचा, आवो जी ऋतुराज
करूँ श्रृंगार मैं सुमन का ,बने बिगड़े काज


नयनन ने सुन लीन्ह नयन नयन की बात
री सखि मारक बहुत कामदेव की घात

प्रेमपगी ऋतू बसंत है ,सजन नहीं है पास
भाग्य भया विपरीत मम रही ना कोई आस

पीरी चुनर ओढ़कर ऐसा करूँ श्रृंगार
दमकू मैं कनक सम रवि मलिन पड़ जाए

Monday, February 7, 2011

कई साल पहले ...लिखी थी ये ..किसी ख़ास के लिए

एक  रोज़  मैंने  सोचा  तुमको  एक  rose   दूं  मैं
पर  दिल   मेरा  बोला  क्यों  रोज़  rose दूं  मैं
एक  रोज़  rose लेकर  तुम  ज़िन्दगी में आओ
मैं  तो  चाहू  हर  रोज़  rose लाओ
पर  आज  rose day है  मेरा  है  तुमसे  कहना 
मेरी  ज़िन्दगी  में  हर  रोज़  फ्रेश  rose बनकर  रहना ....

Friday, January 28, 2011

शायद तुम्हारी दादी भी यही कहानिया सुनाती होंगी


कोई तो कहे की मेरे
ख्वाब सारे सच है
चाँद पर बुढ़िया
मौत के बाद बने
तारे सच है
होते है उड़ने वाले
कालीन कहीं पर
राजकुमारी के बाल
सच में लगते है
ज़मीन पर 
चूमते ही प्रिंस के
जागती है राजकुमारी
किसी बाग़ में अब  भी
खेलती है परिया सारी
शायद मेरे बचपन
के साथ गुम हो गए 
मेरे तकिये के नीचे से
सपने चोरी हो गए
किसी और को भी
मन भाती होंगी
शायद तुम्हारी दादी भी
यही कहानिया सुनाती होंगी

Tuesday, January 25, 2011

तिरंगा

आज जब ऑफिस में छोटा सा तिरंगा दिल के पास लगाया तो कुछ ऐसा अनुभव हुआ ...खून थोडा और गर्म लगा और धड़कन  की रफ़्तार और तेज़ महसूस हुई, कई दिनों से समाचार पढ़कर ऐसा लग रहा था क्यों तिरंगा फ़हराने पर लड़ाई हो रही है ...पर आज जब तिरंगा दिल के पास लगा तो महसूस हुआ ये सिर्फ तीन रंगों का झंडा नहीं है और भी बहुत कुछ है ... इसको पहनने का सौभाग्य सबको नहीं मिलता ...और मरने के बाद तिरंगे में लिपटने का सौभाग्य भी सबके नसीब में नहीं होता .
आम भारतीय की तरह मेरे लिए भी स्कूल छूटने  के बाद २६ जनवरी और पंद्रह अगस्त छुट्टी के दिन ही रहे है ..... पर पता नहीं आज ऐसा क्यों लग रहा है शायद इस मानसिकता से बाहर निकलू  और सभी को शुभकामनाये दूं ...क्यों नहीं इस दिन को दिवाली या ईद की तरह मना सकते ,क्यों नहीं गले मिल बधाई दे सकते अपने गणतंत्र के लिए ...
जानती हूँ बहुत निराशा है ,भ्रटाचार है , अन्याय है और बहुत बेबस से है हम पर ...जब देश गुलाम था तब भी ऐसा ही माहौल रहा होगा ..तब दुश्मन बाहर से आया था उसे खदेड़ दिया ..पर आज के दुश्मन हमारे बीच ही बैठे है ..मुश्किल है बहुत ही मुश्किल पर कहीं तो इस रात की सुबह होगी ...