चिंदी चिंदी
टुकड़ा टुकड़ा
रात को जोड़ा
चाँद को पकड़ा
रूठा रूठा
हाथ से छूटा
वो भूरा
बादल का टुकड़ा
कुछ बड़े
तारे चिपकाए
कुछ छोटे
यूँही छितराए
रात की रानी
मांग के लाये
काजल भरकर
नैन जलाये
लोरी गाकर
जग सुलाया
बनी प्रेयसी
तुझे बुलाया
अब काहे
मीलों की दूरी
आओ तुमबिन
रात अधूरी
मैं क्या सोचती हूँ ..दुनिया को कैसे देखती हूँ ..जब कुछ दिल को खुश करता है या ठेस पहुंचाता है बस लिख डालती हूँ ..मेरा ब्लॉग मेरी डायरी है ..जहाँ मैं अपने दिल की बात खुलकर रख पाती हूँ
Thursday, July 29, 2010
Monday, July 26, 2010
एक डुबकी गंग धार में
एक डुबकी गंग धार में
कांवर के त्यौहार में
तन मन सब धुल जाए
हर हर गंगे हो जाए
सावन के उस मेले में
मन भर पाओ धेले में
सारा आँचल भर जाए
जय बम भोले हो जाए
दूध दही और शहद
धतूरा भांग और मृग-मद
बेलपत्रि सी चढ़ जाऊं
शायद मैं भी तर जाऊं
घर से इतनी दूरी है
ऐसी ही मजबूरी है
चुल्लू भर आचमन लिया
शायद मैं भी तर जाऊं
कांवर के त्यौहार में
तन मन सब धुल जाए
हर हर गंगे हो जाए
सावन के उस मेले में
मन भर पाओ धेले में
सारा आँचल भर जाए
जय बम भोले हो जाए
दूध दही और शहद
धतूरा भांग और मृग-मद
बेलपत्रि सी चढ़ जाऊं
शायद मैं भी तर जाऊं
घर से इतनी दूरी है
ऐसी ही मजबूरी है
चुल्लू भर आचमन लिया
शायद मैं भी तर जाऊं
Saturday, July 24, 2010
लिखो ना.......(2)
लिखो ना.......
महका बेला
बिखरा काजल
हुई पिया की
बहका आँचल
लिखो ना ....
मधुमास में
मधुमय रातें
प्रेम पगी थी
मीठी बातें
लिखो ना.....
लड़ना चिढना
और रुलाना
देना ताने
फिर मनाना
लिखो ना .....
कितने पल
कितनी बातें
हमने बांटी
कितनी सौगातें
प्रेम तुम्हारा
साथ तुम्हारा
मुझपर ये
विश्वास तुम्हारा
एक सम्मोहन
एक आकर्षण
कर डाला
सबकुछ अर्पण
इतना प्यार
संवर गई मैं
लिखा ह्रदय पर
नाम तुम्हारा
महका बेला
बिखरा काजल
हुई पिया की
बहका आँचल
लिखो ना ....
मधुमास में
मधुमय रातें
प्रेम पगी थी
मीठी बातें
लिखो ना.....
लड़ना चिढना
और रुलाना
देना ताने
फिर मनाना
लिखो ना .....
कितने पल
कितनी बातें
हमने बांटी
कितनी सौगातें
प्रेम तुम्हारा
साथ तुम्हारा
मुझपर ये
विश्वास तुम्हारा
एक सम्मोहन
एक आकर्षण
कर डाला
सबकुछ अर्पण
इतना प्यार
संवर गई मैं
लिखा ह्रदय पर
नाम तुम्हारा
Wednesday, July 21, 2010
लिखो ना ..
लिखो ना ..
पहली मुलाकात
हलकी हरारत
तेज़ धड़कन
आँखों में शरारत
लिखो ना ...
पहली छुअन
हलकी सरसराहट
तेज़ साँसे
बेहद घबराहट
लिखो ना ....
छोटी शामें
लम्बी रातें
बेबाक बे-तकल्लुफ
मीठी बातें
लिखो ना ...
सात फेरे
साथ मेरे
गूंजी शहनाई
नम बिदाई
लिखो ना ...
नया आँगन
सिमटी दुल्हन
कोरे रिश्ते
जुड़ते दिलसे
(जारी .... अभी बहुत लिखना है )
पहली मुलाकात
हलकी हरारत
तेज़ धड़कन
आँखों में शरारत
लिखो ना ...
पहली छुअन
हलकी सरसराहट
तेज़ साँसे
बेहद घबराहट
लिखो ना ....
छोटी शामें
लम्बी रातें
बेबाक बे-तकल्लुफ
मीठी बातें
लिखो ना ...
सात फेरे
साथ मेरे
गूंजी शहनाई
नम बिदाई
लिखो ना ...
नया आँगन
सिमटी दुल्हन
कोरे रिश्ते
जुड़ते दिलसे
(जारी .... अभी बहुत लिखना है )
Sunday, July 18, 2010
रजनीगंधा बन महक उठूँ
मैं सोने सी कुछ आग सी
कभी चमक उठूँ कभी दहक उठूँ
ना जाने किस पल लहक उठूँ
दरिया को संग बहा लूं मैं
बिन मेघ भी जल बरसा लूं मैं
दुनिया के तंग घरौंदे में
गौरया बन मैं चहक उठूँ
खुद के रहस्य में उलझी मैं
टूट गई ना सुलझी मैं
ना जाने कोई किस रात में
ध्रुव तारे सी चमक उठूँ
खुशबू मेरे तन का हिस्सा
हर रंग मुझी से बावस्ता
ना जाने कब किस क्यारी में
रजनीगंधा बन महक उठूँ
कभी चमक उठूँ कभी दहक उठूँ
ना जाने किस पल लहक उठूँ
दरिया को संग बहा लूं मैं
बिन मेघ भी जल बरसा लूं मैं
दुनिया के तंग घरौंदे में
गौरया बन मैं चहक उठूँ
खुद के रहस्य में उलझी मैं
टूट गई ना सुलझी मैं
ना जाने कोई किस रात में
ध्रुव तारे सी चमक उठूँ
खुशबू मेरे तन का हिस्सा
हर रंग मुझी से बावस्ता
ना जाने कब किस क्यारी में
रजनीगंधा बन महक उठूँ
Thursday, July 15, 2010
तुझसे दिल लगने के बाद
माना है वो बिगड़ने के बाद
बरसा है बादल सुलगने के बाद
कभी सामने आना गवारा नहीं था
आज हटते नहीं है निखरने के बाद
पानी मखमल सा सुर्ख लगता है
उनके दरिया में उतरने के बाद
बात है मीठी या जबां मीठी है
जवाब आयेगा चखने के बाद
चाँद से हैं या चाँद रात से है
खुलेगा राज़ हिजाब पलटने के बाद
क्या हैं कीमत मेरे प्यार की
हिसाब मिलेगा शायद मेरे बिकने के बाद
अंगडाई से क़यामत ना आ जाए
कौन बचेगा ज्वार उतरने के बाद
गुमसुमी हरारत बेहोशी और दीवानापन
सारे रोग लगे है तुझसे दिल लगने के बाद
कितने है मेरे मुरीद सिवा उनके
जानेगा ज़माना जनाजा उठने के बाद
बरसा है बादल सुलगने के बाद
कभी सामने आना गवारा नहीं था
आज हटते नहीं है निखरने के बाद
पानी मखमल सा सुर्ख लगता है
उनके दरिया में उतरने के बाद
बात है मीठी या जबां मीठी है
जवाब आयेगा चखने के बाद
चाँद से हैं या चाँद रात से है
खुलेगा राज़ हिजाब पलटने के बाद
क्या हैं कीमत मेरे प्यार की
हिसाब मिलेगा शायद मेरे बिकने के बाद
अंगडाई से क़यामत ना आ जाए
कौन बचेगा ज्वार उतरने के बाद
गुमसुमी हरारत बेहोशी और दीवानापन
सारे रोग लगे है तुझसे दिल लगने के बाद
कितने है मेरे मुरीद सिवा उनके
जानेगा ज़माना जनाजा उठने के बाद
Tuesday, July 13, 2010
ये हश्र एक रोज़ होना ही था
कितनी बेचैन गुजरी है रात
उमस भी हद से ज्यादा थी
पसीना और आंसू एक साथ बहे
घुटन जान लेने पर आमादा थी
तुम सोये सुकून से
हर रिश्ता तोड़ जो आये थे
हम पोटली लिए बैठे रहे लम्हों की
हमारे आँचल में छोड़ आये थे
चार आँखों का नसीब तय हुआ
दो को हँसना दो को रोना था
बड़ा गुरूर था अपनी मोहब्बत का
ये हश्र एक रोज़ होना ही था
उमस भी हद से ज्यादा थी
पसीना और आंसू एक साथ बहे
घुटन जान लेने पर आमादा थी
तुम सोये सुकून से
हर रिश्ता तोड़ जो आये थे
हम पोटली लिए बैठे रहे लम्हों की
हमारे आँचल में छोड़ आये थे
चार आँखों का नसीब तय हुआ
दो को हँसना दो को रोना था
बड़ा गुरूर था अपनी मोहब्बत का
ये हश्र एक रोज़ होना ही था
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