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Monday, September 21, 2009

एक तेरे नाम ने


एक तेरे नाम ने साँसों को बचा रखा है
वरना तेरे बगैर इस दुनिया में क्या रखा है
इक तेरा चेहरा ही है फरिश्तों सा रोशन
इसलिए तुझको सीने से लगा रखा है
एक हम है जिसे तेरे सिवा कोई याद नही
एक तू है जिसने मुझे भुला रखा है

अकसर डर जाती हूँ सोच कर
तू अगर मेरे साथ न होता तो क्या होता
शायद मायूस रहती हर लम्हा
शायद हर पल ये दिल रोता
तू ही है जो न जाने कैसे
बिखरा देता है मुस्कराहट लबों पर
घबराते दिल को सुकून मिलता है
जब रख देता है हाँथ कंधे पर
सच में शायद कभी न सो पाती
जो न लगाता मुझे सीने से
बस तू है वो वजह जो मैं जिंदा हूँ
वरना नफरत सी है अपने जीने से

2 comments:

  1. सोनल जी बहुत ही सुंदर भावपूर्ण कविता है

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