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Thursday, September 24, 2009

ये रिश्ता...


हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है एक सीमा होती है, जब तक इन सीमाओं का पालन होता है तब तक रिश्ते की पवित्रता बनी रहती एक बार ये रेखा पार की तो वापसी का कोई रास्ता नहीं बचता, मोहित और अनूपा के रिश्ते के साथ कुछ ऐसा ही हुआ.........
शादी की पहली वर्षगाँठ पर मसूरी की वादियों में एक दुसरे के आगोश में सिमटे हुए दोनों को जैसे वक़्त का कोई अंदाज़ ही नहीं था ऐसा लग रहा था समय यही रुक जाए...और ये पल ठहर जाए...
क्या तुम हमेशा मुझको ऐसे ही प्यार करोगे..अनूपा नें मोहित के हाँथ को दबाते हुए पूछा..और मोहित ने अपने होंठों से अपुपा के होंटों पर प्यार की स्वीकृति दे दी, दोनों सारी शाम अपने आने वाले कल के बारे में बात करते रहे,
मोहित की जॉब अच्छी चल रही थी और दोनों के खर्चे भी इतने नहीं थे दोनों ने परिवार बढाने का फैसला लिया घर वालों ने भी कहना शुरू कर दिया था...
समय के तो जैसे पर लग गए अनूपा दो बच्चों की माँ बन गई उनके साथ शादी के पांच साल कैसे गुज़र गए, अगले महीने उनकी शादी के छः साल पूरे हो जायेंगे...
बच्चों के साथ कब सुबह से रात और रात से सुबह हो जाती कुछ अंदाज़ नहीं रहता , अनूपा मेरे शेयर के certificates निकाल देना मुझे जरूरी काम है मोहित ने ऑफिस के लिए निकलते हुए अनूपा को बोला...घर का काम निबटा कर छोटी बेटी को दूध पिला कर सुलाने के बाद जब अनूपा ने घडी देखि तो १२.०० बजे थे बेटे के प्ले स्कूल से आने में अभी काफी वक़्त था, पपेर्स के लिए मोहित एक बार फ़ोन भी कर चुका था ..
अलमारी में पपेर्स देखते हुए अचानक अनूपा के हाँथ मसूरी की एल्बम लग गई...उसके पन्ने पलते हुए जैसे ओपा अतीत में पहुँच गई...कितना कुछ बदल गया था इन पांच सालों में अपने को आईने में देखा..आधा दिन बीत गया था अभी तक वो रात की ड्रेस में ही थी बाल बेतरतीब हो रखे थे ,पेट पर कुछ मांस के घेरे बढ़ गए थे...मैं कितनी बदल गई हूँ अनूपा नें शीशे में खुद को निहारते हुए सोचा और मोहित वो तो शायद बिलकुल बदल चुके हैं ........
हर साल ऑफिस में प्रमोशन के साथ नै जिम्मेदारियों के बीच मोहित का घर के लियी और घर वालों के लिए समय कम होता चला गया,घर आने के बाद भी लैपटॉप पर काम ..दोनों साथ रहते रहते कब अजनबी हो गए दोनों को पता नहीं चला,अनूपा और मोहित के बीच बातचीत कम होती चली गई अगर होती भी तो बस बच्चों को लेकर....
अनूपा नें अपने हाँथ देखे कुछ खुरदुरे से लगे क्या फिर कभी वो दिन वापस आयेंगे अपने आप से अनूपा ने पूछा ...कागज़ निकालने के बाद अनूपा ने घर पर निगाह डाली घर तो सजा संवारा था पर सब परफेक्ट रखने में अनूपा खुद को सवारना भूल चुकी थी.
तभी फ़ोन बजा मैं ऑफिस से लेट हो जाउंगा डिनर मीटिंग है तुम वेट मत करना ...दूसरी तरफ से मोहित ने कहा..शुरू शुरू में मोहित इतना लेट नहीं होते थे पर पिछले दो तीन महीने से मोहित काफी लेट आने लगे थे....सोचते हुए अनूपा लेट गई इतनी देर में फ़ोन फिर से बजा...इस समय कौन है अलसाते हुए अनूपा ने फ़ोन उठाया...कैसी हो मेमसाहब ...मिनी दीदी ख़ुशी से अनूपा बोली
रायपुर से मिनी दीदी का फ़ोन था, मिनी दी अनूपा की सहेली बहिन और बहुत कुछ...
तेरे जीजाजी टूर दिल्ली आ रहे है १५ दिनों के लिए तो सोचा मैं भी आ जाऊं..तुझे कोई परेशानी तो नहीं...
क्या बात करती हो दीदी अनूपा ने ख़ुशी से चहकते हुए बोला...मिनी दी के आने की खबर से अनूपा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने मोहित को भी फ़ोन करके खबर दी....
अरे अनूपा तुने अपनी क्या शकल बना रखी है..गले लगते हुए दीदी ने बोला..क्या करूँ दीदी समय ही नहीं मिलता दीदी के चमकते हुए चेहरे की तरफ देखकर सकुचाते हुए सनुपा बोली ...
कितना मेन्टेन कर रखा है दीदी ने..ऐसा लगता ही नहीं की दो बड़े बड़े बच्चे है....
अनूपा और मोहित के रिश्ते के बीच पसरते सन्नाटे और ठंडेपन को दीदी अनूपा और मोहित के रिश्ते के बीच पसरते सन्नाटे और ठंडेपन को दीदी की नज़रों ने आसानी से भांप लिया.तेरे और मोहित के बीच सब ठीक तो है ना....दोपहर में बिस्तर पर लेटे हुए दीदी ने पूछा,हाँ सब ठीक है आप को क्या कुछ गलत लग रहा है अनूपा ने उबासी लेटे हुए कहा..
दो दिन हो गए मुझे यहाँ आये हुए तुमको और मोहित को ना तो बात करते देखती हूँ ना हस्ते हुए साथ होकर भी जैसे साथ नहीं हो....
मोहित को मेरे लिए और बच्चों के लिए बिलकुल टाइम नहीं है वो सारा दिन ऑफिस में रहते है और मैं यहाँ घर और बच्चों में........
दीदी बोली पति के साथ रिश्ते को इतने हलके से मत लो कहीं देर ना हो जाए ....
आप का कहने का क्या मतलब है दीदी अनूपा के चेहरे पर बेचैनी की लकीर खिंच गई
क्रमशः

6 comments:

  1. honest comment: well, once again, plot aachaa hai, rawangi bhi hai (and that's very imp for me as a reader) par pehla para baki plot se mel nahin kha raha, woh infidility ki taraf ishara karta hai.
    Some more honesty: frankly, story (till now) lacks surprise elements, twists and turns and seems predictable.
    Aapke writing style ki ek quality hai, i.e. words aur flow pehchana sa lagta hai. Now, this cud be both good or bad, depending upon how u use it.
    One more point: Your stories have beautiful structuring......admired that in both the stories.

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  2. Thanks bhaiyaa......abhi to shruwaat hai "kahani abhi baaki hai mere dost

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  3. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
    यहाँ भी आयें आपके कदमो की आहट इंतजार हैं,
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  4. सोनल जी बहुत ही सुंदर

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