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Monday, August 2, 2010

चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंने


हर सुबह आईने से


मुखातिब होता हूँ

किसी रोज़ तो

सही सूरत दिखलायेगा

चेहरे पे चेहरा

चढ़ाया है मैंने

एक रोज़ तो

ये उतर जाएगा

जो कहता है मुझसे

मैं सबसे भला हूँ

उसी का बुरा अक्सर

मैंने किया है

जो आया मरहम

की उम्मीद लेकर

बड़ा जख्म उसको

मैंने दिया है

हमेशा तो मेरी

ये फितरत नहीं थी

इस शहर ने शायद मुझे

कुछ और बना दिया है

26 comments:

  1. यह तो हमारी फितरत नहीं,इस शहर ने मुझे कुछ और बना दिया ।
    सुन्दर

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  2. कमाल कि अभिव्यक्ति, बहुत सुन्दर!

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  3. ye aaine jo tumhe kam pasand karte hai..unhe khabar hai tumhe hum pasand karte hai..so dont worry sonal...:))) just kidding...good one!

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  4. बहुत सुन्दर!

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  5. हमेशा तो मेरी
    ये फितरत नहीं थी
    इस शहर ने शायद मुझे
    कुछ और बना दिया है
    ...behtreen abhivykti.... shubhkamnayne

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  6. हर चेहरे पर एक चेहरा चढा है
    सुन्दर रचना

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  7. आईना तो सूरत ही दिखायेगा। उस सूरत में आपको क्या दिखता है, यह असली बात है।

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  8. वाह, बहुत बढ़िया ...मुखौटे चढ़े ही रहते हैं ...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  9. वह शहर जहाँ सीमेण्ट की नित उगती ईमारतें धरती के साथ बलात्कार करती हों, वहाँ ऐसी ही नाजायज औलाद पैदा होंगी... कंक्रीट के जंगल में बसने वाले जानवरों का सही चेहरा दिखाया है आपने...

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  10. Hi..

    Shahar ka asar tumpe beshak hua ho..
    Na badlega najuk sa dil ye tumhara..
    Tum pathar main pathar bhale ho gaye ho..
    Tera mom sa dil, ye dava humara..

    Sundar bhav..

    Deepak..

    Samay ho to kabhi mere blog par bhi aayen..

    www.deepakjyoti.blogspot.com

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  11. जो आया मरहम

    की उम्मीद लेकर

    बड़ा जख्म उसको

    मैंने दिया है

    आज की दुनिया का एक सच यह भी है..


    बढ़िया प्रस्तुति..धन्यवाद

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  12. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

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  13. asardar abhivykti...........
    aabhar.........

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  14. आइना सच का देख कहाँ पाते हैं हम.. बहुत ही बढ़िया..

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  15. जो कहता है मुझसे मैं सबसे भला हूँ
    उसी का बुरा अक्सर मैंने किया है
    जो आया मरहम की उम्मीद लेकर
    बड़ा जख्म उसको मैंने दिया है ..
    ..
    सच कहती हो कई लोंग करते हैं ऐसा ...
    मगर क्यों करते हैं लोंग ऐसा ...?

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  16. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  17. इस शहर ने शायद मुझे

    कुछ और बना दिया है ...सोनल जी .. बहुत गहरी बात बहुत ही सजहता से के रही हैं आप साथ में रूमानियत से भी ...

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  18. इस शहर ने शायद मुझे

    कुछ और बना दिया है ......

    Bhai vah ..kya baat hai.

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  19. जो आया मरहम

    की उम्मीद लेकर

    बड़ा जख्म उसको

    मैंने दिया है

    हमेशा तो मेरी

    ये फितरत नहीं थी

    इस शहर ने शायद मुझे

    कुछ और बना दिया है

    अच्छी प्रस्तुति।

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  20. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई।

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