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Thursday, July 29, 2010

रात अधूरी ....

चिंदी चिंदी


टुकड़ा टुकड़ा

रात को जोड़ा

चाँद को पकड़ा

रूठा रूठा
हाथ  से छूटा

वो भूरा

बादल का टुकड़ा

कुछ बड़े

तारे चिपकाए

कुछ छोटे

यूँही छितराए

रात की रानी

मांग के लाये

काजल भरकर

नैन जलाये

लोरी गाकर

जग सुलाया

बनी प्रेयसी

तुझे बुलाया

अब काहे

मीलों की दूरी

आओ तुमबिन

रात अधूरी

29 comments:

  1. टुकड़ा टुकड़ा

    रात को जोड़ा

    चाँद को पकड़ा

    रूठा रूठा

    हाँथ से छूटा

    वो भूरा

    बादल का टुकड़ा
    कुछ अलग ,,,परन्तु सुन्दर रचना ,,,,मनभावन सी ,,,गाने लायक ,,,,!!!....

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  2. बहुत बढ़िया मन को विभोर करने वाली रचना बधाई हो आपको

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  3. बेहतरीन रचना...... बहुत खूब!

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  4. ओह!
    शब्द योजना ऐसी है जैसे रिमझिम फुहार पड़ रही हो, टप-टप बूंदें झर रही हो।
    बनी प्रेयसी

    तुझे बुलाया

    अब काहे

    मीलों की दूरी

    आओ तुमबिन

    रात अधूरी

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  5. आपकी शैली सादगी से भरी, बात कहने में अनूठे, दूसरों से भिन्न फॉर्मेट अपनाती हैं। कविता का सलीका, तरीक़ा, रखरखाव, आपका अपना है। नई विधि-प्रविधि, जिसमें कविता की आत्मा झांकती है। आप एक कविताकार के रूप में मौलिक सर्जक है।

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  6. चिंदी चिंदी


    टुकड़ा टुकड़ा

    रात को जोड़ा

    चाँद को पकड़ा

    रूठा रूठा

    हाँथ से छूटा

    वो भूरा

    बादल का टुकड़ा
    ....leek se hatkar bahut sundar rachna.

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  7. एक मिनट सोनल जी एक मिनट… पढते वक़्त साँस कहाँ लेना है ये तो बता दीजिए... आपके शब्द तो ए.के. 56 की तरह बरस रहे हैं और दिमाग़ में दृश्य खिंचता जा रहा हैं... और ऐसा आवाहन एवम् निमंत्रण कौन अस्वीकार कर पाएगा. एक बेहतरीन शब्द चित्र.. धन्यवाद!!
    (हाँथ को हाथ कर लें)

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  8. मनमोहक अन्दाज में बहुत सुन्दर कविता

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  9. बड़ी सुन्दर, बहती हुयी

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  10. @संवेदना के स्वर -लय से गाया तो लगा वाकई लगा ब्रेअथ्लेस बन गया है ,त्रुटी सुधार ली है धन्यवाद

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  11. बहुत सुन्दर रचना! बधाई।

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  12. बेहतरीन रचना...... बहुत खूब!

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  13. न्युन शब्दों में अथाह भाव,धाराप्रवाह काव्यधारा, बधाई
    मेरे लिये तो कम शब्दों में काव्य प्रतिभा की प्रसस्ति करना दुष्कर है।

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  14. बहुत सुन्दर रचना....

    और हमने अभि तक ए के - ४७ ही सुना था यह ५६ भी है क्या ?

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  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  16. virah vedna ...ghame furqat.....shab e tanhai ...sab ko sath bitha ke..ye nazm sunai jaaye...unhe lagega .."yar hum bhi khubsurat hain" .....shandar nazm ...

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  17. bahut khub rachna,...
    achhi lagi....

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  18. @atish ji .. ab humein is comment par waah waah kehnaa padhegaa

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  20. This comment has been removed by the author.

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  21. सोनल जी,,, नमस्कार...

    तन मन जिस पर वार दिया है...
    अपना सब कुछ हार दिया है...
    आँखों मैं कजरे की धार...
    किया जो तुमने ये श्रृंगार...

    चिंदी चिंदी रात को जोड़ा...
    चंदा अपने आँगन मोड़ा...
    तारे तुमने जो छिटकाए..
    मन को तेरे है महकाए...

    वो तो तेरे संग रहा है..
    तेरे दिल में बसा दिखा है...
    चाहे आज वो दूर हो तुझसे...
    तेरे संग रहा है दिल से...

    सुन्दर भाव...और गुनगुनाने लायक कविता...
    बहुत सुन्दर...

    दीपक...

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  22. sonal bahut hi romantic si nazm hai...shuru se aakhir tak...sundar pravah..g8 job ! :)

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  23. मनमोहक अन्दाज में बहुत सुन्दर कविता

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  24. सोनल जी ..क्या खूबसूरत शब्दों की फुहार है। आज ही दिल्ली में बारिश हुई ...मैं सोया हुआ था देर दुपरहिया तक। पर शब्दों की फुहार में भींग कर उसका मलाल कम हो गया.....
    अब काहे
    मीलों की दूरी
    आओ तुमबिन
    रात अधूरी

    बालकोनी में बैठ कर चांद को निहारना....क्या तस्वीर भी लगाई है आपने....
    वैसे जिसके लिए पुकार है क्या वो आ गए.........अगर न आए तो बडे पत्थर दिल हैं...

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  25. लिल्लाह!
    खूबसूरत!
    कौन मना कर पाएगा????
    सम्हाल के, आप काफी ऊँचाई पे बैठी हैं! कहीं गिर ना जाएँ!
    सायरा बानु ने रोक लिया.... वर्ना मैं तो.....!

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