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Friday, May 28, 2010

बहुत गर्म दोपहरी है

उन्होंने समेट कर जुल्फे


ढीला सा जुडा बनाया है

जो इठलाता हुआ

गर्दन पे सरक आया है

मेरी साँसे उसके

खुलने पर ही ठहरी है

अब साए को तरसाओ मत

बहुत गर्म दोपहरी है

31 comments:

  1. वाह ! सोनल जी ! कमाल की सुन्दर, रसीली, सृजन-शक्ति है ,,,बहुत खूब लाजवाब ..निहाल हुए

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  2. गोया इस दोपहरी में रूमानी पन !!

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  3. behn sonl ji fntaastik dophri kaa zulfon se km shbdon men khubsurt miln koi vishaal di vaalaa saahitykaar hi kr sktaa he jo kmaal aapne kr dikhaayaa iske liyen bdhaai meraa hindi blog akhtarkhanakela.blogspot.com he

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  4. वाह...बहुत गज़ब की दोपहरी है...:):) खूबसूरत एहसास

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  5. i call it a contemporary style of expression..

    :)

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  6. वाह! क्या बात है!

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  7. ज़ुल्फ़ के साए में शाम करके सफर इक उम्र का पल में तमाम करने की बात वास्तव में लाजवाब है.
    आपने तो थोड़े शब्दों में बहुत कुछ कह दिया.
    बहुत बहुत बधाई !

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  8. सुन्दर रचना...

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  9. ha ha ha


    achha he


    sandar becheni he aap ki

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  10. मेरी साँसे उसके

    खुलने पर ही ठहरी है

    अब साए को तरसाओ मत

    बहुत गर्म दोपहरी है





    तपन है और ख्वाहिशें है
    वक्त की आजमाइशें हैं

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  11. Hi..
    Ab saye ko tarsao mat..
    Ye jude..bina khule rah jao mat..

    Wah.. Kya kavita kahi hai..

    Sundar kavita..

    DEEPAK..

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  12. गर्मी की दुपहरी में रूमानियत ...!!

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  13. KYA BAAT HAI...
    HAHAHA....
    bahut khub...
    yun hi likhna jaari rakhein...

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  14. aur haan mere blog par...
    तुम आओ तो चिराग रौशन हों.......
    regards
    http://i555.blogspot.com/

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  15. इस गरम मौसम में थोड़ा सा रुमानी हो जाना भी अच्छा लगता है.. वाह... संवेदी रचना.... साधुवाद.....

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  16. सोनल जी
    मेरी साँसे उसके

    खुलने पर ही ठहरी है

    ये बात हम कहने वाले थे आपको कैसे पता चल गया.जरा बताएंगी....छठी इंद्री लगता है कि आपकी सजग थी.....
    पर हां मेरी सांसे ठहरी नहीं थी..अटक गयी थीं...

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  17. Sonal didi
    आपने तो थोड़े शब्दों में बहुत कुछ कह दिया.

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  18. MAAAAAAAAAAAASHA ALLAH WAAH JWAB NAHI AAPKA
    LAUKI KHAYENGE K BAAD YE RACHNA BAHUT AUCHHI LAGI .

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  19. अरे कोई उनसे भी तो पूछो की वो इस गर्मी के चलते अपना जुड़ा खोलना भी चाहते हैं या नहीं ;-) वरना ऐसा ना हो जिनकी साँसने ठहरी है इस गर्मी के चलते ठहरी ही न रह जाएँ और खुलता हुआ जुड़ा बाजये खुलने के वापस टाइट हो जाये....हा हा हा .... मौसमी पोस्ट॥ :-)

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