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Monday, June 28, 2010

दिन हरजाई

कुछ तन्हाई

एक रजाई

बदन तोडती

एक अंगडाई

ठन्डे हाँथ

तपती साँसे

अंगीठी से

गायब गरमाई

मौन मुखर

मुखरित आँखे

मौन अधर

मुखरित जम्हाई

सहज नेह

असहज हो तुम

असहजता को

दे आज बिदाई

रात ढली

तुम आये

जल्दी ढलता

दिन हरजाई

28 comments:

  1. वाह! क्या बात है!

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  2. इस कविता पर,
    बहुत बधाई ।

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  3. कम शब्दों में उच्च कोटि की रचना ,,,,बेहतरीन

    विकास पाण्डेय
    www.vicharokadarpan.blogspot.com

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  4. शानदार.. जानदार और...

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  5. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

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  6. बढ़िया है!



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  7. दिलचस्प.........!

    बस ये सोचता रहा गया ...के उर्दू से शुरू होकर .आखिर में हिंदी में क्यों मुड़ी ....कोई खास वजह ?

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  8. कुछ तन्हाई

    एक रजाई

    बदन तोडती

    एक अंगडाई
    ....do shabdo ke yugm se bani acchhi rachna.....vaah.

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  9. @अनुराग जी ,
    गंगा जमनी तहजीब का असर कह लीजिये ...कब विचारों ने भाषा का संगम कर दिया मुझे खुद नहीं पता चला

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  10. kya baat kya baat kya baat .. :) ek dum dhinchak poem... badi meethi poekm hai ... chhoti chhoti pankitayaan hain deewali ki chutputiya jaisa maza de rahi hain .. bahut bahut shandaar

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  11. hi sonal..bahut dino baad blog par aana hua...
    aakar dekha shbdon ke moti chamak rahe hai :)

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  12. बस कमाल!! ज़्यादा लिखा तो कविता से मेल नहीं खाएगी मेरी तारीफ़...

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  13. इस कविता की अलग मुद्रा है, अलग तरह का संगीत, जिसमें कविता की लय तानपुरा की तरह लगातार बजती रहती है । अद्भुत मुग्ध करने वाली, विस्मयकारी।

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  14. बीस दूनी चालीस शब्दों मे बंधे भाव! सुन्दर रचना।

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  15. सोनलजी
    शब्द- युग्मों के मोतियों के दानों से पिरोयी गई अच्छी प्रवहमान रचना के लिए बधाई !

    … इधर भीषण गर्मी है …

    कविता पढ़ कर भीतर - बाहर तपिश बढ़ती हुई प्रतीत होने लगी ।
    रजाई , अंगीठी , तपती साँसे ,
    और … अंगीठी से गायब गरमाई !
    भीतर तक मारक क्षमता रखने वाले बिंब !

    बधाई दे चुका ना ?
    एक बार और स्वीकार करें … बधाई !!

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  16. kavita ki ye tapish iss tapish ko bhi tapan de gai
    bahut acha lga apki kavita padh k

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  17. सहज शव्‍दों में गहरी अभिव्‍यक्ति, धन्‍यवाद.

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  18. रफ्ता...रफ्ता.....एकदम मस्त कविता। बहुत सुंदर।

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  19. very intelligent and diligently presented the expression of romance, just brilliant...

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  20. गर्मी में जाड़े की यादें। क्या बात है!
    मुखरित जम्हुआई मजेदार लगा। खूब! छोटे-छोटे शब्दों का प्रयोग आपको बहुत प्यारा आता है।

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