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Thursday, April 8, 2010

आशा बाकी है लाडली

(यह कविता श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता अंक- 7 में चयनित हुई तो सोचा आप सब के साथ बाँट लूं )


अभी आशा बाकी है लाडली


कुहासा छटेगा धूप निकलेगी

बाहें फैला कर भर लेना तुम

सारी सीलन उड़ जायेगी



अभी कंधो में दम है

तेरे चलने तक उठा सकती हूँ

घबराना नहीं मेरी गुडिया

अँधेरे को मिटा सकती हूँ



तेरी छुअन के सहारे

मैं इतनी देर जी सकी हूँ

तेरी मुस्कान के दम से

सारे विष पी सकी हूँ

18 comments:

  1. सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  2. कुछ शीतल सी ताजगी का अहसास करा गई आपकी रचना।

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  3. वाकई सुन्दर रचना है..श्रेष्ट सृजन में सम्मलित होने के लिए आपको बधाई.

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  4. bahut sundar rachna....itna pyar to bas stree hi khud me samete rehti hai...

    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,आपको बधाई.

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  6. माँए सारी ऐसी ही हिम्मत वाली होती है..
    माँ बेटी के भावो को सही उकेरा है..

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  7. ख़ूबसूरत जज़्बातों का सुंदर शब्दावली के साथ प्रस्तुतिकरण ! बधाई !!
    मां की बेटी के प्रति भावनाओं को एक नारी ही ज़्यादा अच्छी तरह समझ सकती है ।
    बहुत बहुत शुभकामनाएं !
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  8. kavita ki ek ek pankti mann me utar gayi...
    bahut behtareen....
    mere blog me is baar तुम मुझे मिलीं....
    jaroor padhein...
    aapke margdarshan ki jaroorat hogi....

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  9. अभी आशा बाकी है लाडली
    कुहासा छटेगा धूप निकलेगी
    बाहें फैला कर भर लेना तुम
    सारी सीलन उड़ जायेगी

    अभी कंधो में दम है
    तेरे चलने तक उठा सकती हूँ
    घबराना नहीं मेरी गुडिया
    अँधेरे को मिटा सकती हूँ

    तेरी छुअन के सहारे
    मैं इतनी देर जी सकी हूँ
    तेरी मुस्कान के दम से
    सारे विष पी सकी हूँ
    bahut pyari sii rachna ke liye Badhai!!

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  10. वाह !
    ममता की सफल अभिव्यक्ति , शुभकामनायें !

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  11. bahut-bahut-bahut pyari kavitaa....man ko chhoo lene vali.......

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  12. तेरी मुस्कान के दम से
    सारे विष पी सकी हूँ
    वाकई मुस्कान में दम है
    बेहतरीन रचना बधाई श्रेष्ठ सृजन में सम्मिलित होने के लिये

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  13. अभी कंधो में दम है
    तेरे चलने तक उठा सकती हूँ
    घबराना नहीं मेरी गुडिया
    अँधेरे को मिटा सकती हूँ ..

    इंसान चाहे तो सब कुछ कर सकता है ... किसी मासूम बचपन के लिए तो तिनका भी नाव बन सकता है ...
    प्रेरित करती अच्छी रचना ...

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  14. सोनल जी, इस रचना पर जितने भी कमेन्ट आये हैं, वे सब साधुवाद के पात्र हैं कि उनमे अच्छे को अच्छा कहने का हौसला है. मैं उन सब को सलाम करता हूँ. मेरे मेल पर बताएं कि किस खास रचना के लिए आपने कहा था.
    kishorejakhar@gmail.com

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  15. ममस्‍पर्शी और हौसला देने वाली कविता है।
    सोनल जी अपने ब्‍लाग का टेम्‍पलेट बदलिए। यह न तो आपकी कविताओं से मेल खाता है और न आपके व्‍यक्तित्‍व से। लोड होने में भी समय लेता है।

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