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Saturday, July 3, 2010

पहली बारिश और हम तुम....

सिमटे सिमटे


सीले सीले

आधे सूखे

आधे गीले

पहली  बारिश

और हम तुम

सुलगे सुलगे

दहके दहके

थोड़े संभले

थोड़े बहके

पहली  बारिश

और हम तुम

चाय की प्याली

गर्म पकोड़े

मुंह  में भरते

सी सी करते

पहली बारिश

और हम तुम

सावन आये

सावन जाए

जिया करेंगे

संग रहेंगे

पहली  बारिश

और हम तुम

35 comments:

  1. फोटो और रचना दोनों मनभावन लगे ,कुछ-- याद दिला गया ।

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  2. "बेहतरीन.....पर अच्छी-खासी कविता रोमानी हुए जा रही थी जिसमे एक-दूसरे को चुपचाप देख कर भी पूरा दिन गुज़र जाता..लेकिन आपने पकोड़े,चाय दे कर अच्छा नहीं किया ....पर सोचता हूँकि बुरा भी तो नहीं किया आखिर कार हर खुशी का अंत खाने पर ही तो होता है...बहुत बढ़िया ..."

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  3. @अमृतघट जी
    पहली बारिश हो ..रोमानी हो पर पेट में चूहे दौड़ जाए ..पास में भजियावाला गर्मागर्म पकोड़े उतार रहा हो .... रोमांस उसके बिना तो अधूरा ही रहेगा

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  4. फोटो ने कविता के भावों को और ज्यादा रूमानी बना दिया है।
    ................
    अपने ब्लॉग पर 8-10 विजि़टर्स हमेशा ऑनलाइन पाएँ।

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  5. वाह, बारिश और पकौडों का साथ...बहुत खूब..

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  6. सुलगे सुलगे
    दहके दहके
    थोड़े संभले
    थोड़े बहके
    पहली बारिश
    और हम तुम
    सीमित शब्द पर
    बहुत सुन्दर एहसास ... सुन्दर भाव
    बहुत खूब

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  7. Hi..

    Pahli barish ka ye mausam ..
    Garm pakode priyatam ke sang..
    Aadhe seele, aadhe geele..
    Garam chai peete ho jo tum..

    Sundar khakha kheencha tumne..
    Barkha ki dekhi hai rimjhim ..
    Tere sang main bheege hum bhi..
    Aaya jo barkha ka mausam..

    Sundar kavita..

    Deepak..

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  8. सोनल जी,101 वीं पोस्‍ट,पहली बारिश,बारिश के पकौड़े और वह जिसके साथ आखिरकार आप हैं(और अगर अब तक कोई न हो तो जो आपके ख्‍यालों में है), सब मुबारक हों। कविता सचमुच अच्‍छी है और जैसा रश्मि जी ने कहा सिरहन पैदा करती है।

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  9. बारिश के सारे रंग देखने को मिले आपकी कविता में :)

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  10. अच्‍छी कविता, धन्‍यवाद.

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे ०४.0७.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. बारिश रूठी है दिल्ली से
    और पसीने में सीले से
    दूर दूर बैठे हैं हम तुम…
    आपकी कविता बारिश का सर्द झोंका बनकर आई...दिल्ली की गर्मी और अल्लाह मेघ दे की पुकार के बीच बस यही कविता एक राहत है...

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  13. आपने तो बारिश में ही आग लगा दी ।

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  14. कविता इतनी अच्छी है कि बहुत से लोगों को बारिश में भी जलन हो सकती है...।

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  15. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!!

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  16. बारिश रूठी है दिल्ली से
    और पसीने में सीले से
    दूर दूर बैठे हैं हम तुम…

    बहुत सुंदर

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  17. लाजवाब .....बारिश ने आज दिल्ली को छुआ ....और इस मौसम में आपकी कविता पढ़ के तो मन झूम सा गया ....अति उत्तम रचना .

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  18. पहली बारिश की कहानी लाजवाब है ... मदमस्त कर देती है बारिश की बूँदें ....

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  19. बहुत सुंदर कविता...

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  20. kya barsi hai ye kavita.... do do boondon ki dhara ne...dil ke parde bhigo diye... :) ek dum solid..mehki mehki mitti jaisi.. :)

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  21. "सीले सीले
    आधे सूखे
    आधे गीले
    पहली बारिश
    और हम तुम
    सुलगे सुलगे
    दहके दहके
    थोड़े संभले
    थोड़े बहके
    पहली बारिश
    और हम तुम"

    पोस्ट्स का सैकड़ा पूरा करने पर हार्दिक बधाई

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  22. ऐसा लगा कि गुलज़ार साब की किसी कविता को पढ़ रहे हों..."आधे गीले- आधे सूखे" अच्छी रचना. मानसून का सुन्दर स्वागत किया आपने

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  23. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ...

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  24. मन को भी भीगा दी आपकी कविता ! बहुत रूमानी!

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  25. बहुत सुन्दर एहसास ... सुन्दर भाव

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  26. its just brilliant, so simple so innocent... really good... keep writing...

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  27. वाह ये तो बहुत मजेदार! जानदार कविता है। बारिश का भी क्या मजा है। खूब!

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  28. one of your best pen...awesome...great work...

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  29. एक दूजे का
    हाथ पकडे
    पानी भरे
    गड्ढे में
    छपाक करते
    हम और तुम

    pahli barish ki sondhi si mahak liye sunda rkavita

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  30. सुन्दर अभिव्यक्ति |

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  31. वाह , बहुत सुंदर

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  32. वाह क्या कहने पहली बारिश के ! बारिश मेँ भीगने के साथ प्यार मेँ सराबोर होने का लुत्फ ही अलग है । बधाई

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